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छत्तीसगढ़

बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गोपाल स्नैक्स की बड़ी पहल

बच्चों की सेहत, देश की शक्ति: गोपाल स्नैक्स के समर्थन से हर महीने 7 लाख बच्चों तक पहुँच रहा ‘मंत्रौषधि सुवर्णप्राशन अभियान’ का लाभ

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राजकोट, मार्च 2026 : भारत के कई शहरों और गांवों में हर महीने माता-पिता अपने बच्चों के साथ नजदीकी केंद्रों पर एकत्रित होते हैं और पीढ़ियों से चली आ रही एक सरल आयुर्वेदिक परंपरा का हिस्सा बनते हैं। कई परिवारों के लिए यह केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी संतानों को अधिक पुष्ट और आरोग्यवान बनाने के संकल्प से जुड़ा एक मंगलकारी प्रयास है।

आज यह परंपरा ‘मंत्रौषधि सुवर्णप्राशन अभियान’ के माध्यम से प्रति माह सात लाख से अधिक बालकों तक पहुँच रही है। यह पहल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है और इसका ध्येय बालकों के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना है। इस कार्यक्रम को गोपाल स्नैक्स लिमिटेड के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत निरंतर सहयोग प्राप्त हो रहा है।

कंपनी मई 2023 से इस पहल से जुड़ी हुई है और कार्यक्रम के विस्तार हेतु प्रति वर्ष लगभग ₹1.5 करोड़ का योगदान दे रही है। देशभर के स्वयंसेवकों और सामुदायिक केंद्रों की सहायता से यह कार्यक्रम परिवारों को एकजुट कर बालकों को अधिक सुदृढ़ और स्वस्थ बनाने के ध्येय को पूर्ण कर रहा है।

इस पहल का मुख्य केंद्र ‘सुवर्णप्राशन’ है, जोआयुर्वेद का एक पुराना और असरदार तरीका है। माना जाता है कि बचपन से ही इसे शुरू करने से बच्चों की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है और उनका शरीर और दिमाग, दोनों अच्छे से विकसित होते हैं। इस मुहिम से जुड़े कई माता-पिता ने बताया है कि उन्हें बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं, खासकर उन बच्चों में जो पहले बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ जाते थे।

वाराणसी के श्री विश्वनाथ दातार की मेहनत का हीपरिणाम है कि आज यह अभियान घर-घर पहुँच रहा है। आयुर्वेद में रुचि के चलते उन्होंने 38 साल तक रिसर्च की और 1970 में इस परंपरा को दोबारा शुरू किया। 55 साल का यह सफर आज 850 केंद्रों और 1,600 स्वयंसेवकों तक पहुँच चुका है, जो बच्चों के बेहतर कल के लिए काम कर रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘फिट इंडिया’ अभियान को भी मज़बूती देती है, जिसका लक्ष्य हर भारतीय को जागरूक और सेहतमंद बनाना है।

*बिपिन हडवाणी (संस्थापक, गोपाल स्नैक्स) ने बताया कि* इस पहल के ज़रिए लोगों के जीवन में आ रही खुशहाली को देखकर ही कंपनी ने इसके साथ जुड़ने का निर्णय लिया। हमारा मकसद बच्चों को एक सेहतमंद भविष्य देना है।

उन्होंने कहा, “एक मज़बूत देश तभी बन सकता है जब हमारे बच्चे स्वस्थ हों। इस अभियान से परिवारों को मिल रहे लाभ को देख कर हमें लगा कि इससे जुड़ना ही सबसे सही फैसला है। हमारे लिए CSR का मतलब उन कामों का हिस्सा बनना है जो लोगों की ज़िंदगी में सचमुच बदलाव लाते हैं।“

उनका मानना है कि बच्चों के स्वास्थ्य में निवेश करना राष्ट्र के भविष्य के लिए सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा, “हमारी कर्मचारियों के साझा प्रयासों से जो फंड इकट्ठा हुआ है, उसे हम युवाओं को सशक्त बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। आज बच्चों की सेहत में लगाया गया हर रुपया, भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को मज़बूत कर रहा है।”

गोपाल स्नैक्स की चीफ ऑफ स्टाफ, शिवांगी हडवाणी ने कहा कि यह अभियान इस बात का सबूत है कि जब हमारी पुरानी परंपरा और सबका साथ मिल जाता है, तो कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा, “एक स्वस्थ समाज का सपना बच्चों से ही शुरू होता है। यह अभियान हमारी विरासत, नई सोच और हजारों मददगारों की मेहनत का एक शानदार मेल है। हमें गर्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी की सेहत संवारने में मदद कर रहे हैं।”

इस अभियान में बच्चों को दी जाने वाली यह आयुर्वेदिक औषधि ‘संस्कृति आर्य गुरुकुलम’ द्वारा खास तौर पर तैयार की जाती है। इसमें स्वर्ण भस्म के साथ-साथ ब्राह्मी, शंखपुष्पी और शहद जैसी प्राकृतिक चीजों का मेल है। इसे पूरी तरह से पारंपरिक तरीके और मंत्रों के साथ तैयार किया जाता है। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल बच्चों की बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है, बल्कि उनकी याददाश्त और शारीरिक विकास में भी फायदा मिलता है।

बाल-स्वास्थ्य के प्रति उनके अटूट योगदान को देश के सर्वोच्च स्तर पर सराहा गया, जब 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपतिरामास्वामी वेंकटरमन ने श्री विश्वनाथ दातारको’राष्ट्रपति पुरस्कार’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार श्री विश्वनाथ दातार द्वारा आयुर्वेद के माध्यम से बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उनके मिशन की एक बड़ी जीत थी।

गोपाल स्नैक्स इस मुहिम को लगातार अपना सहयोग दे रहा है और साथ ही यह उम्मीद भी करता है कि अन्य संस्थाएँ और लोग भी बच्चों की सेहत के इस काम में आगे आएँ। आइए, मिलकर अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ और मज़बूत भविष्य तैयार करें।

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