
हिमाचल पर कुदरत का कहर: जब उफनती नदियों ने मचाई तबाही!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जब आसमान रोया और ज़मीन कांप उठी: हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश का तांडव- हिमाचल प्रदेश, जो अपनी ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है, इन दिनों भारी बारिश की मार झेल रहा है। ऐसा लग रहा है मानो कुदरत का गुस्सा आसमान से बरस रहा हो। कई जगहों पर तो ऐसी भयानक भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने लोगों की ज़िंदगी ही अस्त-व्यस्त कर दी। सोचिए, आपकी अपनी दुकान हो या घर, सब कुछ बह जाए, और इमारतों को ताश के पत्तों की तरह ढहते हुए देखें। मनाली में तो ब्यास नदी का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ एक पूरी की पूरी बहुमंजिला होटल और उसके साथ चार दुकानें देखते ही देखते पानी के तेज़ बहाव में समा गईं। मनाली-लेह जैसे महत्वपूर्ण रास्ते भी कई जगहों पर बंद हो गए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। गनवी खड्ड का पानी भी घरों में घुस गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, चंबा और लाहौल-स्पीति जैसे जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, यानी यहाँ हालात बहुत गंभीर हो सकते हैं, और कई दूसरे जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट है, जो सावधानी बरतने का संकेत है।
संकट की घंटी: मंडी और शिमला में बिगड़े हालात, स्कूल-कॉलेज भी बंद-मंडी जिले में तो सोमवार की रात ने लोगों को डरा ही दिया, जब दो बड़ी-बड़ी इमारतें, जिनमें लगभग 40 दुकानें थीं, ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। गनीमत रही कि इन इमारतों को पहले ही खाली करा लिया गया था, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं, शिमला में भी लगातार हो रही बारिश की वजह से भूस्खलन हुआ और कई बड़े-बड़े पेड़ अपनी जड़ों से उखड़ गए, जिससे सड़कें पूरी तरह से जाम हो गईं। जिला प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। यही हाल मंडी, कांगड़ा, चंबा, ऊना, सोलन और कई अन्य जिलों का भी है, जहाँ शैक्षणिक संस्थानों को फिलहाल बंद कर दिया गया है। राज्य आपातकालीन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 795 सड़कें पूरी तरह से बंद हैं और 956 ट्रांसफार्मर तथा 517 पानी की सप्लाई योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों को बिजली और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
आँकड़े जो बताते हैं दर्द: करोड़ों का नुकसान और जान-माल का ख़तरा-20 जून से लेकर 25 अगस्त तक, यानी करीब दो महीनों से लगातार हो रही बारिश ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। इस दौरान, बारिश से जुड़ी घटनाओं में दुखद रूप से 156 लोगों की जान जा चुकी है और 38 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। राज्य ने इस मानसून में 77 बार अचानक आई बाढ़, 41 बार बादल फटने जैसी भयावह घटनाओं और 81 बड़े भूस्खलनों का सामना किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक इस बारिश और बाढ़ से करीब 2,394 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मानसून सामान्य से 22% ज़्यादा सक्रिय रहा है। जून से अब तक राज्य में कुल 703.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 577.9 मिमी बारिश होती है। खास बात यह है कि सिर्फ अगस्त महीने में ही अब तक सामान्य से 44% ज़्यादा बारिश हो चुकी है, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है।

