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हांगकांग ओपन 2025: सात्विक-चिराग की जबरदस्त वापसी, फाइनल में पहुंचकर लिखी नई कहानी

सात्विक-चिराग का जलवा: हांगकांग ओपन फाइनल में धमाकेदार एंट्री!-वाह! क्या बात है! आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका हम सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। हमारे प्यारे बैडमिंटन के सितारे, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, ने हांगकांग ओपन सुपर 500 के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में उन्होंने जिस तरह का खेल दिखाया, उसे देखकर तो बस मज़ा आ गया! सीधे सेटों में जीत हासिल करके उन्होंने न सिर्फ फाइनल का टिकट कटाया, बल्कि पूरे भारत को गर्व से भर दिया। ये जीत सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि कई मुश्किलों से लड़कर वापसी की कहानी है।

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 लगातार छह सेमीफाइनल की बाधा पार, अब फाइनल में दहाड़!-सोचिए, इस साल ये जोड़ी लगातार छह बार सेमीफाइनल तक पहुंची, लेकिन हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ये वाकई किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत मुश्किल दौर होता है, जब आप फाइनल के इतने करीब आकर भी चूक जाते हैं। लेकिन सात्विक और चिराग ने हार नहीं मानी। उन्होंने चीनी ताइपे के बिंग-वेई लिन और चेन चेंग कुआन को 21-17, 21-15 से हराकर इस सिलसिले को तोड़ दिया। ये जीत उनके मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास का जीता-जागता सबूत है। अब फाइनल में उनका मुकाबला किससे होगा, ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इस जीत ने ये साबित कर दिया है कि ये जोड़ी किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।

 मुश्किलों का पहाड़ पार, वापसी का शानदार सफर-ये सिर्फ एक खेल की जीत नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक और ज़बरदस्त वापसी भी है। पिछले साल ओलंपिक में मेडल से चूकने का दर्द अभी भी कहीं न कहीं रहा होगा, लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने उम्मीदें फिर से जगा दी थीं। सात्विक को जहां कोहनी की चोट और फिर चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों से लड़ना पड़ा, वहीं उनके पिता के निधन ने उन्हें गहरा सदमा पहुंचाया। दूसरी तरफ, चिराग भी लगातार पीठ की चोट से परेशान रहे। इन तमाम व्यक्तिगत और शारीरिक मुश्किलों के बावजूद, इन दोनों खिलाड़ियों ने जिस तरह से वापसी की है, वो काबिले तारीफ है। ये दिखाता है कि ये सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि योद्धा हैं।

 भारतीय बैडमिंटन के लिए नई सुबह का आगाज़-शनिवार की ये जीत एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि सात्विक और चिराग की जोड़ी भारतीय बैडमिंटन के लिए कितनी बड़ी ताकत है। उनकी ज़बरदस्त फाइटिंग स्पिरिट और कड़ी मेहनत उन्हें दुनिया की टॉप जोड़ियों के बराबर ला खड़ा करती है। फाइनल में पहुंचकर उन्होंने दुनिया को एक साफ पैगाम दिया है कि भारतीय डबल्स अब किसी से कम नहीं हैं। अगर वो ये फाइनल जीत जाते हैं, तो ये इस साल की उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी और आने वाले टूर्नामेंट्स के लिए उनका आत्मविश्वास भी आसमान छूने लगेगा। ये वाकई भारतीय बैडमिंटन के लिए एक नई सुबह का आगाज़ है।

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