शैंपू ऐसी चीज है, जिसमें मौजूद इंग्रिडिएंट्स हेयर और स्कैल्प हेल्थ को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। वैसे तो इसका उपयोग मुख्यतौर पर सिर को धोकर साफ करने के लिए किया जाता है, लेकिन गलती से भी इसमें गलत विकल्प चुन लेना, स्किन प्रॉब्लम्स से लेकर गंजेपन तक की नौबत तक ला सकता है। खासतौर से अगर शैंपू नकली हो, तब तो नुकसान होना तय है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें क्या डला है, ये असल में कितना पुराना है, ये कितना सुरक्षित है, इस तरह की चीजों को नकली प्रोडक्ट में समझ पाना नामुमकिन है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यही वजह है कि इस बात पर खास ध्यान देना पड़ता है कि जिस शैंपू को लिया जा रहा है, वो आखिर असली भी है या नहीं। इस असली-नकली के फर्क को समझने में कुछ तरीके आपके लिए काम के साबित हो सकते हैं।
फेक प्रोडक्ट वाले चाहे जितना भी अच्छा कॉपी क्यों न मार लें, लेकिन पैकेजिंग में कुछ न कुछ अंतर रह ही जाता है। जैसे फॉन्ट में अंतर, इंग्रीडिएंट्स की डीटेल ठीक से न छपी होना, स्टिकर आड़ा-तेड़ा लगा होना, लोगो के आकार या बनावट में अंतर आदि। तो जब आप नया प्रोडक्ट ले रहे हों, तो उसकी पैकेजिंग को बेहद ध्यान से देखें।
कंपनियां अपने प्रोडक्ट के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी की बॉटल चुनने की कोशिश करती हैं। लेकिन इतना ध्यान डुप्लिकेट माल बनाने वाले नहीं रखते। यही वजह है कि इसकी फिनिशिंग से लेकर मोटाई और वजन तक से समझौता किया जाता है। यानी बोतल को हाथ में उठाते ही आपको अंतर साफ महसूस होगा।

