RADA
विशेष
Trending

मिट्टी के उत्पादों को  मिले   बाजार  तो कुम्हारी कला को मिले रफ्तार

सुल्तानपुर । पूरे देश में दिवाली से लेकर अन्य पर्व पर मिट्टी के बर्तनों , दीपों की मांग होती है , केवल चाय के लिए कुल्हड़ जैसे प्रमुख उत्पाद की वर्ष भर मांग रहती है । ज्यादातर कुम्हार पुश्तैनी कार्य में लगे हैं। इनकी रोजी-रोटी व घर-परिवार इसी से चलता है। मिट्टी के उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार न मिलने से कारोबार को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। ऐसे में त्योहारों व सहालग में इनका काम चलता है, अन्य दिनों मे खाली रहना पड़ता है। अब दिवाली पर घर-घर चाक डोल रहे हैं। मिट्टी के खिलौने, दीये व गणेश-लक्ष्मी के साथ अन्य प्रतिमाओं को बनाने व रंग-रोगन का भी काम तेज हो गया है। इनको बेचने के लिए शहर से लेकर गांव तक के बाजार में इन्हें कोई स्थान नहीं मिलता। यदि प्रशासन इसकी व्यवस्था करा दे तो काफी मदद मिल सकती है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

ये खबर भी पढ़ें : दिल दहला देने वाली परंपरा: शव की राख से बना सूप पीते हैं इस जगह के लोग

ये खबर भी पढ़ें : करवा चौथ पर Katrina Kaif की फोटो फंस कर रहे वायरल – Pratidin Rajdhani

जिले में लगभग एक लाख कुम्हार परिवार है। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत कुम्हार का परिवार मिट्टी से तरह-तरह के उत्पाद तैयार करता है। इनमें अधिकतर वर्ष भर कुल्हड़ व अन्य मिट्टी के बर्तन बनाकर जीवन यापन करते हैं। सरकार इनके व्यवसाय का आधुनिकीकरण करने के लिए हाथ के बजाय बिजली से चलने वाले चाक मुहैया करा रही है। उत्पादों को बेचने के लिए इनको दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। चौक व अन्य जगहों पर ये अपना उत्पाद बेचते हैं तो भवन मालिकों को दुकान लगाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। इससे इनके उत्पाद में मेहनत व लागत बराबर हो जाती है। मुनाफे के नाम पर कुछ नहीं बचता। यही कारण है कि इनके उत्पाद पर बाजारीकरण हावी होता जा रहा है। बाजार में आर्टिफिशियल दीये भी आने लगे हैं। मिट्टी के दीये पूजन में शगुन तक सीमित हो जा रहे हैं। गभड़िया के विजय कुमार बताते हैं कि त्योहार आने से महीने भर पहले पूरा परिवार इस काम में रात-दिन जुटकर प्रतिमाएं व दीया आदि बनाया जाता है। बिक्री के लिए बाजार में बैठने की जगह नहीं मिलती तो औने-पाैने दाम में उत्पाद बेचना पड़ता है। लागत व पूरे परिवार की मेहनत जोड़ दी जाए तो कुछ बचता नहीं है, लेकिन पुश्तैनी व्यवसाय है जिसे मजबूरी में करना पड़ता है। गभड़िया की सरिता ने बताया कि मिट्टी के खिलौने व प्रतिमाओं को तैयार करने के बाद इसे बाजार में बेचने का संकट रहता है। प्रशासन द्वारा त्योहार पर किसी जगह बाजार निर्धारित कर दिया जाए तो मदद मिलेगी। गभड़िया की सुनीता ने बताया कि सब्जीमंडी, गल्लामंडी, किराना मंडी आदि बाजार चिन्हित है। हमारा भी पुश्तैनी कारोबार है। इसके लिए भी प्रशासन को त्योहार पर कहीं जगह चिन्हित कर देनी चाहिए।

ये खबर भी पढ़ें : सुषमाके स्नेहिल सृजन – आसमां उड़ान भरो – Pratidin Rajdhani

ये खबर भी पढ़ें : सुषमाके स्नेहिल सृजन – आसमां उड़ान भरो – Pratidin Rajdhani

उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड के सदस्य मंगरू प्रजापति ने बताया कि जिले में मिट्टी से बने उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए अध्यक्ष के माध्यम से मांग करेंगे। इस बार त्योहार पर जिलाधिकारी के माध्यम से शहर में स्थान दिलवाए जाने की मांग की गई है। राष्ट्रीय प्रजापति महासभा के जिलाध्यक्ष माता प्रसाद प्रजापति ने बताया कि पूरे जिले में 60 से 70 हजार परिवार के जीविकोपार्जन का यह मुख्य साधन है। प्रमुख बाजारों में इस कारोबार के लिए जगह चिन्हित करने को लेकर शासन-प्रशासन से मांग करेंगे।

ये खबर भी पढ़ें : देर रात केमिकल गोदाम में लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान

Join Us
Back to top button
12 हजार से भी कम, 8GB रैम और 5G सपोर्ट के साथ 25,000 में ट्रेन से 7 ज्योतिर्लिंग यात्रा, जानें पूरा पैकेज और किराया IRCTC Bharat Gaurav चलेगी 10 पैसे प्रति किलोमीटर e-Luna Prime,सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक iPhone से Pixel तक स्मार्टफोन पर बेस्ट डील्स, आज आखिरी मौका