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IND vs SRI 2nd Test: सारांश जैन ने रचा इतिहास, 94 साल के टेस्ट इतिहास के खास क्लब में बनाई जगह

Saransh Jain’s record: टीम इंडिया के नए ऑफ स्पिनर सारांश जैन (Saransh jain) युवा क्रिकेटरों के लिए एक बड़ा पॉजिटिव हैं कि कोशिश करने वाले की हार नहीं होती. प्रतिभा उनकी सीमित है, गेंदों को उतना घुमाव नहीं मिलता, जैसा पूर्व में भारत के पारंपरिक ऑफ स्पिनरों के पास रहा है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में बिना थके लगे रहे, तो भारत के लिए टेस्ट जर्सी पहने में सफल हो ही गए. और अब  सारांश ने खुद को कोलंबो के सिहंली स्पोर्ट्स क्लब में दूसरे टेस्ट के चौथे दिन खास कारनामा करते हुए खुद को भारतीय टेस्ट इतिहास के ऐसे शीर्ष 5 गेंदबाजों में शामिल करा लिया, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा उम्र में अपने करियर का पहला विकेट लिया.  हालांकि, सारांश ने रिकॉर्डबुक के ये आंकड़े तीसरे दिन मंगलवार को ही बदल दिए थे, लेकिन वह बुधवार को भी वह एक और विकेट लेने में सफल रहे. कुल मिलाकर सारांश ने फेंके 20.4 ओवरों में 49 रन देकर 2 विकेट चटकाए. चलिए जान लीजिए कि भारत के करीब 94 साल के टेस्ट इतिहास में वो शीर्ष पांच गेंदबाज कौन हैं, जिन्होंने देश के लिए सबसे ज्यादा उम्र में पहला विकेट लिया.

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            गेंदबाज
विकेट के समय उम्रबनामखास बात
रुस्तमजी जमशेदजी41 साल, 27 दिन इंग्लैंड, मुंबई, 1933बाएं हाथ के स्पिनर,  इकलौते टेस्ट में 137 रन देकर 3 विकेट लिए
आमिर इलाहीबनाम ऑस्ट्रेलिया, सिडनी, 1947ऑस्ट्रेलिया, सिडनी, 1947लेग स्पिनर, भारत के लिए खेलने के बाद बाद में पाकिस्तान चले गए
केकी तारापोर37 साल, 329 दिनबनाम वेस्टइंडीज, दिल्ली, 1948बाएं हाथ के स्पिनर, करियर में सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला
श्यूट बनर्जी37 साल, 124 दिनबनाम वेस्टइंडीज, मुंबई, 1949तेज-मध्यम गति के गेंदबाज, मैच में शानदार 5 विकेट चटकाए
सारांश जैन33 साल, 145 दिनबनाम श्रीलंका, कोलंबो, 2026ऑफ-स्पिनर, 21वीं सदी में भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यू करने वाले खिलाड़ी

सारांश जैन के जीवन की 5 बड़ी बातें

सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम तक का सफर बेहद भावुक और प्रेरणादायी है. 33 वर्ष की उम्र में बिना किसी आईपीएल चकाचौंध के भारतीय टीम में शामिल होकर टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले इस खिलाड़ी के बारे में कुछ ऐसी अनकही और अनसुनी बातें जो उनके संघर्ष को बयां करती हैं:पारिवारिक सपने और बड़ा बलिदान

क्रिकेट विरासत का सपना 

सारांश के पिता सुबोध जैन स्वयं मध्य प्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके थे. उनका सपना भारत के लिए खेलने का था, जो पूरा नहीं हुआ, तो उन्होंने यही सपना अपने बेटों में देखा.

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बड़े भाई से ट्रांसफर हुआ सपना 

शुरुआत में सारांश के बड़े भाई को परिवार की मुख्य क्रिकेट उम्मीद माना जाता था. जब बड़े भाई का करियर आगे नहीं बढ़ पाया, तब पूरा ध्यान और उम्मीदें सारांश पर टिक गईं.

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