
सूरज कुमार वाकरे की प्रेरक यात्रा: मोटराइज्ड ट्रायसायकल से मिली नई उड़ान
सूरज कुमार वाकरे की प्रेरक यात्रा: मोटराइज्ड ट्रायसायकल से मिली नई उड़ान
गौरेला पेंड्रा मरवाही, गौरेला विकासखंड के ग्राम बस्ती के सूरज कुमार वाकरे ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी चुनौती सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। सूरज 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी शिक्षा और सपनों को नहीं छोड़ा। सूरज वर्तमान में डॉ. भंवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय पेंड्रा में बी.ए. अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज आने-जाने में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
परिवहन की सुविधा सीमित होने के कारण उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और निरंतर आगे बढ़ते रहे।
सुशासन तिहार के तहत लमना में आयोजित शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा सूरज को मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह सहायता उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई। मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से अब उनका कॉलेज आना-जाना आसान हो गया है। वे अपने कार्यों को अधिक आत्मनिर्भरता के साथ कर पा रहे हैं और समय की भी बचत हो रही है। सूरज का कहना है कि इस सुविधा ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है। अब वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं और भविष्य में बेहतर अवसरों के लिए तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना है कि शिक्षा पूरी कर समाज में अपनी पहचान बनाएं तथा अन्य दिव्यांग युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनें।
सूरज कुमार वाकरे की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदत्त मोटराइज्ड ट्रायसायकल ने न केवल उनकी गतिशीलता बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में भी नई राह दिखाई है। सूरज ने शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

