Kareena Kapoor: 25 साल के सफल करियर के बाद भी करीना कपूर को खलता है अधूरापन, बताया जिंदगी का सबसे बड़ा अफसोस

Kareena Kapoor: बॉलीवुड में ढाई दशकों से अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली अभिनेत्री करीना कपूर खान आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा और दमदार अभिनय से करोड़ों दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है, लेकिन कामयाबी के इस ऊंचे मुकाम पर पहुंचने के बावजूद उनके जीवन में एक ऐसी कमी रह गई है जिसे लेकर वे अक्सर भावुक हो जाती हैं। छोटी उम्र में ही रुपहले पर्दे की चमक-दमक से जुड़ने के कारण उन्हें अपनी स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी थी और यह बात आज भी उन्हें एक खालीपन का अहसास कराती है।
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किशोरावस्था का फैसला और पढ़ाई से दूरी
इंटरव्यू के दौरान अपनी शुरुआती जिंदगी के पन्नों को पलटते हुए अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि 11वीं कक्षा के बाद उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ाई। उस समय उनका पूरा ध्यान अभिनय की दुनिया में खुद को साबित करने पर था। उन्होंने बताया कि उस उम्र में अपने सपनों को पूरा करने और दिल की बात सुनने का जुनून इस कदर हावी था कि शिक्षा को आगे बढ़ाने का अवसर होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से दूरी बना ली। हालांकि उम्र और अनुभव के साथ अब उन्हें अहसास होता है कि डिग्रियां और औपचारिक शिक्षा केवल कागजों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे व्यक्ति के व्यक्तित्व को गढ़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। अभिनेत्री का मानना है कि यद्यपि उन्होंने अपने जुनून को पूरा किया, लेकिन एक व्यवस्थित शिक्षा प्रणाली से वंचित रह जाना उनके जीवन का एक ऐसा अध्याय है जिसे वे बदल पाना चाहती हैं।
पहले शिक्षा, फिर करियर
अपने इसी अनुभव से सीख लेते हुए अभिनेत्री अब अपने बच्चों की परवरिश को लेकर बेहद संजीदा हैं। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे तैमूर और जेह वही गलती न दोहराएं जो उनसे हुई थी। उनका स्पष्ट मानना है कि जीवन में किसी भी क्षेत्र में हाथ आजमाने या अपने सपनों का पीछा करने से पहले एक मजबूत शैक्षणिक आधार होना बेहद जरूरी है। वे अपने बेटों को हमेशा यही सीख देती हैं कि पहले अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा को पूरी निष्ठा से समाप्त करें और उसके बाद ही कला या किसी अन्य क्षेत्र में अपना करियर बनाने के बारे में सोचें। उनका मानना है कि शिक्षा व्यक्ति को सही निर्णय लेने की समझ और मानसिक परिपक्वता प्रदान करती है।
सामाजिक कार्यों से जुड़ाव और बालिकाओं की शिक्षा पर जोर
अपनी इस व्यक्तिगत कमी के अहसास ने ही उन्हें सामाजिक सरोकारों से गहराई से जोड़ा। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों और खासकर लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाओं के साथ एक सक्रिय प्रतिनिधि के रूप में जुड़ी हुई हैं। जब उन्हें देश भर में बेटियों की पढ़ाई और लैंगिक समानता के समर्थन के लिए आगे आने का प्रस्ताव मिला, तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया। उनका मानना है कि जब तक देश की हर बेटी को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा का अधिकार नहीं मिलता, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है। अपने जीवन के इसी मलाल को वे अब लाखों अन्य लड़कियों के उज्ज्वल भविष्य की ढाल बना रही हैं।
अभिनय यात्रा की शुरुआत से लेकर ‘दायरा’ तक का सफर
गौरतलब है कि सन 2000 में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री ने बेहद कम उम्र में ही अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा था। अपनी पहली ही फिल्म से उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और देखते ही देखते हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं। अब वे जल्द ही मेघना गुलजार के निर्देशन में बन रही वास्तविक घटनाओं पर आधारित एक क्राइम-थ्रिलर फिल्म ‘दायरा’ में एक कड़क पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन भी मुख्य भूमिका में हैं। बिना किसी व्यावसायिक गानों वाली यह संजीदा फिल्म आगामी 18 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

