
महापौर मीनल चौबे ने छग विद्युत नियामक आयोग के समक्ष जनहित में रखे अनेक सुझाव
रायपुर नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विद्युत नियामक आयोग नगर निगम रायपुर को ग्रास सब्सिडाइजेशन श्रेणी में ना रखे और व्यबसायिक दर श्रेणी से बाहर रखे
अधिक बिजली बिल के कारण आवश्यक सेवाएँ प्रभावित होंगी.
रायपुर – रायपुर नगर पालिक निगम जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है. छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग रायपुर नगर पालिक निगम को व्यवसायिक दरों की श्रेणी से बाहर रखे. रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग सलाहकार समिति की बैठक में सम्मिलित होकर जनहित में नगर हित से जुडी अनेक सुझावों को विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा.
महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने विद्युत विनामक आयोग सलाहकार समिति की बैठक में स्पष्ट कहा कि रायपुर नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है.नगर निगम जनसेवा कार्य शहर में करता है. स्टीट लाईट, वाटर पम्प, सार्वजनिक शौचालय पर विद्युत पावर कम्पनी को कमर्शियल टेरिफ की दरें नहीं लगानी चाहिए. इस हेतु विद्युत विभाग को पब्लिक यूटिलिटी स्लेब बनाना चाहिए, जो डोमेस्टिक दर के समान हो. महापौर ने नियामक आयोग के समक्षकहा कि दरों को 7.35 रू प्रति यूनिट के स्थान पर 5.10 रू. प्रति यूनिट किया जाना चाहिए.
महापौर ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष कहा कि नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, उसको ग्रास सब्सिडाइजेशन श्रेणी में ना रखा जाये.कारण कि बिजली बिल अधिक आने के कारण नगर निगम रायपुर को आवश्यक मूलभूत नागरिक सेवा सफाई, पानी आदि के बजट में कटौती करनी पड़ रही है.
महापौर ने कहा कि नगर निगम को राहत मिलेगी, तो नगर निगम विद्युत की बचत कर पायेगा. 300 करोड़ रू का बिजली बिल और उस पर 50 करोड़ रू का सरचार्ज नगर निगम रायपुर को अंततः यूजर चार्ज और सम्पतिकर के रूप में ही जनता की जेब से वसूलना होगा, अतः नगर निगम रायपुर को व्यवसायिक दर श्रेणी से बाहर रखें.

