
मैगी संकट के बाद 10 साल में 2.5 गुना बढ़ा Nestle India का कारोबार – जानिए कैसे बदली कंपनी ने अपनी किस्मत
नेस्ले की वापसी: मैगी विवाद से 20,000 करोड़ तक का सफ़र!-2015 का मैगी विवाद नेस्ले के लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन आज कंपनी ने न सिर्फ़ अपनी पहचान वापस पाई है बल्कि 20,100 करोड़ के टर्नओवर के साथ नई ऊंचाइयाँ छू रही है। आइये जानते हैं कैसे!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मैगी विवाद और वापसी की रणनीति-FSSAI ने 2015 में मैगी पर बैन लगा दिया था, जिससे नेस्ले को भारी नुकसान हुआ। लेकिन कंपनी ने हार नहीं मानी और महज़ पाँच महीनों में मैगी को फिर से बाजार में ला दिया। इस वापसी के पीछे थी नेस्ले की दृढ़ता और नई रणनीति।
सुरेश नारायणन का नेतृत्व और RUrban रणनीति-सुरेश नारायणन के नेतृत्व में नेस्ले ने ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया और ‘RUrban’ रणनीति शुरू की। इससे कंपनी की पहुँच बढ़ी और बिक्री में जबरदस्त इज़ाफ़ा हुआ। उनके नेतृत्व ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया।
नए उत्पाद और विविधीकरण-नेस्ले ने अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाकर 150 से ज़्यादा नए उत्पाद लॉन्च किये। अब कंपनी सिर्फ़ मैगी तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉफ़ी, चॉकलेट, और पेट फ़ूड जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है। इस विविधीकरण ने कंपनी को और मज़बूत बनाया है।
विस्तार और ‘मेक इन इंडिया’-नेस्ले ने अपने उत्पादन को भी बढ़ाया है। गुजरात में एक नया प्लांट शुरू किया गया है और ओडिशा में दसवीं फैक्ट्री बनाने की योजना है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने अपने निवेश में भी बढ़ोतरी की है।
वैश्विक स्तर पर सफलता-आज नेस्ले इंडिया, नेस्ले SA के टॉप 10 ग्लोबल मार्केट्स में शामिल है। मैगी के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यह सफलता नेस्ले की कड़ी मेहनत, रणनीतिक सोच, और ग्राहकों के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
संकट से सफलता की कहानी-नेस्ले इंडिया की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है जो दिखाती है कि कैसे एक कंपनी मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर नई ऊंचाइयों को छू सकती है। यह कंपनी की दृढ़ता, नवाचार और रणनीतिक सोच का परिणाम है।

