
भारत सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सेमिकॉन इंडिया 2025 के उद्घाटन समारोह में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अब भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण पर काम कर रही है। मोदी का मानना है कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में चिप्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाना जरूरी है। सरकार का फोकस घरेलू स्तर पर चिप्स के निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देने पर है, ताकि भारत न सिर्फ आत्मनिर्भर बने बल्कि दुनिया को भी तकनीक उपलब्ध करा सके।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में खनिजों का महत्व
मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि डिजिटल ढांचे की नींव महत्वपूर्ण खनिजों पर टिकी है। मोबाइल से लेकर लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों तक, हर जगह इन दुर्लभ खनिजों की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि भारत ने क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की शुरुआत कर दी है। इसका उद्देश्य इन मिनरल्स की बढ़ती मांग को पूरा करना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। सरकार चाहती है कि भारत इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बने और उद्योग जगत को मजबूत सप्लाई चेन मिल सके।
दुर्लभ खनिजों की मांग पूरी करने की तैयारी
मोदी ने कहा कि आने वाले समय में दुर्लभ खनिजों की मांग और तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में भारत ने पहले ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का मकसद सिर्फ खनिजों की खोज और खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका बेहतर इस्तेमाल और रिसर्च भी शामिल है। सरकार इस दिशा में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को भी जोड़ना चाहती है। इससे देश की डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री को मजबूत आधार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
भारत के बने चिप्स से बदलेगा भविष्य
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में बनी सबसे छोटी चिप भी दुनिया में सबसे बड़ा बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि जब भारत के युवाओं और वैज्ञानिकों की क्षमता टेक्नोलॉजी से जुड़े नए इनोवेशन में लगेगी, तो भारत ग्लोबल लेवल पर बड़ी ताकत बनेगा। मोदी का कहना था कि भारत सिर्फ चिप्स बनाने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी की दिशा और भविष्य तय करने वाला देश बनेगा।
डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम का नया रूप
मोदी ने यह भी साफ किया कि सरकार जल्द ही नई डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम को आकार देने जा रही है। इसका मकसद देश में चिप डिजाइन करने वाले इंजीनियरों और कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। अब तक भारत में कई बड़ी कंपनियां सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित थीं, लेकिन इस योजना से डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी भारत को मजबूती मिलेगी। इससे भारत सिर्फ निर्माण ही नहीं बल्कि नवाचार (innovation) के लिए भी जाना जाएगा।

