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 नारायणपुर में नक्सलियाें के आईईडी विस्फाेट में एक मजदूर की माैत, एक अन्य घायल

नारायणपुर ।  नारायणपुर जिले के छोटे डोंगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आमदई माइंस जाने वाले रास्ते में नक्सलियाें के लगाये गये प्रेशर आईईडी विस्फाेट की चपेट में आने से शुक्रवार को एक मजदूर की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। इसमें से एक मजदूर के पैर के चिथड़े उड़ गए। आईजी बस्तर ने इसकी पुष्टि की है।

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मजदूर दिलीप कुमार बघेल की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई थी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एक मजदूर की माैत हाे गई है, वहीं घायल हरेंद्र नाग जिला अस्पताल में इलाजरत है, जिनकी हालत सामान्य एवं खतरे से से बाहर है।

नक्सलियों ने आमदई माइंस जाने वाले रास्ते में जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रेशर आईईडी लगाकर रखा था। आज सुबह 10:30 बजे के आस-पास गांव के दो मजदूर दिलीप कश्यप और हरेंद्र नाग माइंस की तरफ जा रहे थे। इसी बीच यहां नक्सलियों के लगाए गए प्रेशर आईईडी में मजदूरों का पैर आ गया और जोर का धमाका हुआ। इस धमाके में इनके पैर के चिथड़े उड़ गए। उस इलाके से गुजर रहे अन्य मजदूरों ने इसकी जानकारी तत्काल पुलिस को दी। मौके पर पहुंचकर पुलिस दोनों घायल मजदूरों को छोटे डोंगर के अस्पताल ले आयी। यहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों मजदूरों को बेहतर उपचार के लिए नारायणपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसमें से एक मजदूर दिलीप कुमार बघेल की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई थी, जिसकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है।


उल्लेखनीय है कि इसी छोटे डोंगर थाना इलाके में एक वर्ष पहले नक्सलियों की लगाई प्रेशर आईईडी की चपेट में आकर दो मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि एक मजदूर घायल हुआ था। यह सभी मजदूर आमदई माइंस में काम करने के लिए जंगल के रास्ते से जा रहे थे। इसी दौरान प्रेशर आईईडी पर इनका पैर आ गया था। इस घटना के बाद नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी कर कहा था कि नारायणपुर के आमदई माइंस के चारों तरफ बारूद बिछा हुआ है। पहाड़ के ऊपर से लेकर नीचे तक पुलिस कैंप के आस-पास सैकड़ों बम लगाये गये हैं। अभी तो सिर्फ एक ही बम फटा है, आगे और भी बम फटेंगे।

बारूद फोर्स के लिए लगाया गया था, लेकिन मजदूर उसकी चपेट में आ गए। नक्सलियों ने कहा था, यहां करीब 6 पुलिस कैंप बनाए गए हैं और हर दिन 400 से 500 गाड़ियों से ढुलाई की जा रही है। आस-पास गांव के करीब 400 लोग यहां काम करने जा रहे हैं। हर मजदूर को 550 रुपये दिए जा रहे हैं, जो दिनभर डंडा लेकर खड़े रहते हैं। पैसों का लालच देकर इन्हें मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।

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