छत्तीसगढ़

खुले गड्ढे बने मौत का जाल, बच्चों की सुरक्षा पर नगरीय प्रशासन को आयोग की सख्त अनुशंसा

खुले गड्ढे बने मौत का जाल, बच्चों की सुरक्षा पर नगरीय प्रशासन को आयोग की सख्त अनुशंसा

खुले गड्ढे बने मौत का जाल, बच्चों की सुरक्षा पर नगरीय प्रशासन को आयोग की सख्त अनुशंस

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*डॉ. वर्णिका शर्मा की चेतावनी: खुले गड्ढों से बच्चों को बचाने के लिए नगरीय प्रशासन तत्काल करे व्यवस्था*

*बारिश में खुले गड्ढों का बढ़ा खतरा, नगरीय प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश*

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आज नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टर व नगरीय निकायों के उच्चाधिकारियों को एक बेहद सख्त अनुशंसा भेजते हुए लेख किया है कि आयोग के समक्ष इस प्रकार के प्रकरण देखने में आये हैं, जिसमें कि कॉलोनी में निर्माणाधीन गढ्ढे खुुले होने, सड़कों पर गढ्ढे खुले होने अथवा बारिश में नालियों के ढक जाने के कारण उसमें बच्चे गिर पड़े हैं एवं उनके जीवन का अंत हो गया है। आयोग ने इसे बेहद दुःखद माना है एवं आयोग द्वारा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 तथा सहपठित धारा 15 के तहत बच्चों के जीवन के अधिकार की रक्षा को देखते हुए यह अनुशंसा क्रमांक आर-191/30.06.2026 की है कि, नगरीय क्षेत्र में तत्काल एक सर्वेक्षण अभियान चलाकर ऐसे खुले गढ्ढों, नालियों या निर्माणाधीन स्थलों कोे चिन्हाँकित कर लिया जाये और उन्हें या तो भर दिया अथवा उनके चारो ओर सुरक्षा कवच के रूप में बल्ली आदि से बाड़ी लगा दी जाये जिससे बच्चे उसमें न गिरने पायें, समस्त निर्माण एजेन्सियों तथा आवासीय कॉलोनियों को यह निर्देश जारी किये जाये कि किसी भी प्रकार से निर्माण के लिए खोदे गये नींव स्थल/कॉलम स्थल/अन्य कारणों से खोदे गये गढ्ढों के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगाकर इस प्रकार बंद करना कि वहाँ बच्चे आवाजाही करते समय न गिरें यह सुनिश्चित करें, संवेदनशील निर्माणाधीन स्थलों पर निर्माण एजेन्सियाँ एक चौकीदार/सुरक्षाकर्मी भी इस हेतु तैनात करें जो बच्चों को जोखिम से बचाने में सहायक हो सके। अनुशंसा में यह भी लेख है कि बारिश में खेलते समय या शाला आते जाते समय पैदल चलते बच्चों को बारिश के छोटे गढ्ढे अथवा बड़े गढ्ढों में अंतर समझ में नहीं आता है एवं बच्चों को अनजाने में ही जान का खतरा उत्पन्न हो जाता है। अतः इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए मंत्रालय तथा विभागाध्यक्ष स्तर से पर्याप्त निर्देश प्रसारित किये जायें एवं जिला स्तर पर जिला कलेक्टर व नगरीय निकाय के उच्चाधिकारी तत्काल इस विषय पर पहल करें एवं इसे नियमित साप्ताहिक समय सीमा के पत्रों पर कार्यवाही की समीक्षा के विषय के रूप में शामिल किया जाये। आयोग ने उक्तानुसार अनुशंसा पर कार्यवाही करते हुए निर्देश प्रसारित कर आयोग को दिनांक 07 जुलाई 2026 तक लिखित में अवगत कराने का भी लेख किया है।

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