छत्तीसगढ़

SIR पर विधानसभा में संग्राम: 19 लाख नाम कटने का आरोप, विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मुद्दा गुरुवार को जबरदस्त राजनीतिक टकराव का कारण बन गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया और तत्काल चर्चा की मांग की।
महंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में 19 लाख 13 हजार 450 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उनकी स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। न तो इनके बारे में कोई ठोस रिपोर्ट सामने आई है और न ही यह पता है कि वे कहां हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों के “गायब” होने के बावजूद प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है। उन्होंने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बताते हुए सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की।
इस पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बताया। सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा कि कांग्रेस मुद्दों के अभाव में इस तरह के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया कि SIR जैसी प्रक्रिया राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, बल्कि यह इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के अधीन होती है, जो एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। इसलिए इस विषय पर विधानसभा में चर्चा कराना नियमों के अनुरूप नहीं है।
विपक्ष के लगातार दबाव के बावजूद आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इसके बाद सदन का माहौल और गर्मा गया। नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

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