छत्तीसगढ़

हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाव हेतु सिम्स का वैक्सीनेशन जागरूकता अभियान

जागरूकता और सुरक्षा उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों व विद्यार्थियों को किया जा रहा जागरूक

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बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियारः स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर,/छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) द्वारा हेपेटाइटिस बी एवं सी जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए व्यापक जागरूकता एवं वैक्सीनेशन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी, नर्सिंग स्टाफ तथा विद्यार्थियों को हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण, उसके फैलने के तरीके, लक्षण, संभावित खतरे तथा बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस एक गंभीर संक्रमणजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से लीवर (यकृत) को प्रभावित करती है। हेपेटाइटिस बी और सी वायरस संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित सुई, असुरक्षित रक्त चढ़ाने, संक्रमित उपकरणों के उपयोग तथा संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों एवं नर्सिंग स्टाफ में इसका खतरा अधिक रहता है, क्योंकि वे नियमित रूप से मरीजों के संपर्क में रहते हैं।

चिकित्सकों ने बताया कि हेपेटाइटिस संक्रमण प्रारंभिक अवस्था में सामान्य कमजोरी, भूख कम लगना, उल्टी, बुखार, थकान, पेट दर्द तथा आंखों और त्वचा के पीले पड़ने जैसे लक्षणों के रूप में दिखाई दे सकता है। कई बार यह बीमारी लंबे समय तक बिना लक्षण के भी शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है और बाद में लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

सिम्स प्रबंधन द्वारा इस बीमारी से बचाव के लिए “0-1-6” वैक्सीनेशन शेड्यूल के अनुसार टीकाकरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पहली डोज के बाद एक माह एवं छह माह में अगली डोज लगाई जाती है। अब तक संस्थान में 1189 डोज लगाए जा चुके हैं तथा अभियान को आगे भी निरंतर जारी रखने की तैयारी की जा रही है।

सिम्स में वैक्सीनेशन पूर्ण करने वाले कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को प्रतीक चिन्ह स्वरूप बैच प्रदान कर सम्मानित किया जा रहा है, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर टीकाकरण कराएं और स्वयं को सुरक्षित रखें।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। समय पर टीकाकरण, सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों का पालन तथा स्वच्छता के प्रति सतर्कता अपनाकर इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इस मौके पर सिम्स के अधिष्ठाता डा. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को रोगों की रोकथाम के प्रति भी जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित इंजेक्शन का उपयोग, डिस्पोजेबल सिरिंज का प्रयोग, संक्रमित रक्त से बचाव तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग संक्रमण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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