
-भारत माला परियोजना भ्रष्टाचार मामले पर सरकार की किरकिरी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में 17 मार्च 2025 का दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जब विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सवाल पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा घिर गये। मामला था भारत माला परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच से जुड़े सरकार के फैसले का, जिसे लेकर नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। दरअसल, 12 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भारत माला परियोजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने सरकार से इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। उसी समय, विधानसभा में मौजूद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए संभागायुक्त (कमिश्नर) से जांच कराने की घोषणा कर दी थी, और इस निर्णय पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी सहमति व्यक्त की थी। लेकिन, 12 मार्च की शाम को हुई कैबिनेट बैठक में अचानक सरकार ने अपने निर्णय को बदल दिया और भारत माला परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच संभागायुक्त के बजाय राज्य की एजेंसी ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) से कराने का निर्णय ले लिया। 13 मार्च से 16 मार्च तक विधानसभा का अवकाश रहा, इसलिए 17 मार्च को जब सदन की कायर्वाही फिर से शुरू हुई, तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने यह मुद्दा उठाया और सरकार पर सदन की अवमानना का आरोप लगाया।
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डॉ. चरणदास महंत का कहना था कि जब राजस्व मंत्री ने सदन में यह घोषणा कर दी थी कि भारत माला परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच संभागायुक्त से कराई जाएगी, तो सरकार को इस फैसले को बदलने का अधिकार अकेले कैबिनेट बैठक में नहीं था। अगर सरकार को कोई भी बदलाव करना था, तो उसे फिर से सदन में पेश करना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को सदन की अवमानना और उसकी गरिमा के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, जहां लिए गए निर्णयों की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है।
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सदन में बढ़ते हंगामे के बीच स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से सरकार का पक्ष रखने को कहा। इस पर राजस्व मंत्री ने अपनी गलती स्वीकार की। स्पीकर ने इस पर सरकार को औपचारिक वक्तव्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके बाद ही मामला शांत हुआ। भारत माला परियोजना भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और सुधार के लिए चलाई जा रही एक बहुप्रतीक्षित योजना है। इसके तहत छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण सड़कें और एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं।
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लेकिन, इस परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान पहले से ही काफी तीव्र रही है। इस मामले ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा दे दिया है। विपक्ष इसे सरकार की गोपनीय और मनमानी नीति का प्रमाण बता रहा है, जिससे जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। यह विवाद यह भी दर्शाता है कि क्या सरकार सदन में लिए गए निर्णयों का सम्मान कर रही है या नहीं। सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच ईओडब्ल्यू से कराने का फैसला किया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी? विपक्ष इसे सीबीआई जांच से बचने की रणनीति बता रहा है।
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विपक्ष ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि क्या राज्य सरकार की एजेंसी निष्पक्ष जांच कर पाएगी, या फिर इसे राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित किया जाएगा? ईओडब्ल्यू राज्य सरकार के अंतर्गत आती है, जबकि सीबीआई केंद्र सरकार की स्वतंत्र एजेंसी है। ईओडब्ल्यू पर अतीत में कई मामलों में पक्षपात के आरोप लगे हैं। अगर सरकार को सच्चाई उजागर करनी थी, तो सीबीआई जांच से परहेज क्यों किया गया? विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा के बाहर भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार को अब यह साबित करना होगा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ वास्तव में सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर ईओडब्ल्यू की जांच में देरी या पक्षपात के संकेत मिलते हैं, तो यह मामला हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में 17 मार्च 2025 को जो स्थिति उत्पन्न हुई, वह लोकतांत्रिक प्रणाली में सदन की महत्ता और सरकार की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को दर्शाती है। अगर सरकार सदन में किए गए अपने वादों से पीछे हटने लगे, तो यह लोकतंत्र की आत्मा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
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भारत माला परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही जनता के विश्वास को बनाए रख सकती है। अब यह देखना होगा कि सरकार विपक्ष के आरोपों का जवाब किस तरह देती है और क्या यह जांच सही दिशा में आगे बढ़ पाती है या नहीं।
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