
चंडीगढ़ । शंभू बार्डर खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी तथा किसानों के बीच सोमवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। बैठक में सुप्रीम कोर्ट समिति के सभी सदस्य शामिल हुए लेकिन किसानों के धरने का नेतृत्व करने वाले किसान नेता सरवन सिंह पंधेर तथा जगजीत सिंह डल्लेवाल बैठक में नहीं आए। जिन किसान नेताओं ने बैठक में भाग लिया वह आंदोलन के प्रमुख चेहरे नहीं थे।
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फसलों पर एमएसपी की गारंटी को लेकर पंजाब के किसान फरवरी-2024 से हड़ताल पर हैं। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने हरियाणा और पंजाब के शंभू बॉर्डर को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया था। किसानों ने पंजाब की तरफ बॉर्डर पर स्थायी मोर्चा बना लिया। ऐसे में वहां से आवाजाही बंद है। इससे अंबाला के व्यापारियों को परेशानी हो रही है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को बॉर्डर खोलने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
सोमवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा भवन में कई घंटे तक चली बैठक में जस्टिस नवाब सिंह के अलावा, पूर्व आईपीएस अधिकारी पीएस संधू, गुरु नानक यूनिवर्सिटी, अमृतसर के प्रोफेसर देवेंद्र शर्मा, एग्रीकल्चर एंड इकोनॉमिक एक्सपर्ट रणजीत सिंह, डॉ. सुखपाल सिंह, हरियाणा कृषि विवि के वाइस चांसलर बीआर कम्बोज, हरियाणा और पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक शामिल हुए।
बैठक से कुछ घंटे पहले ही सरवन सिंह पंधेर ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। जगजीत सिंह डल्लेवाल ने स्वास्थ्य ठीक नहीं होने का दावा करते हुए अपने प्रतिनिधियों को बैठक में भेजा। किसानों ने अपनी 12 मांगें सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सामने रखी। किसानों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती है, तक तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। बैठक के बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि आने वाले लोकसभा सत्र के दौरान भूख हड़ताल शुरू करेंगे। बैठक में किसान नेता इस बात पर भी सहमत नहीं हुए कि अगर शंभू बार्डर खोला जाता है कि वह ट्रैक्टरों, जेसीबी आदि के साथ दिल्ली कूच नहीं करेंगे। कई घंटे तक चली बैठक में किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बनी।

