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आज पेश होगा बजट, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 बजे शुरू करेंगी भाषण; आम आदमी, किसान और कारोबारियों के लिए क्या खुलेगा पिटारा

आज 1 फरवरी है और देश की निगाहें संसद पर टिकी हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह करीब 11 बजे बजट 2026-27 पेश करेंगी. यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले साल में महंगाई, रोजगार, निवेश और ग्रोथ की दिशा क्या होगी? अब सवाल यही है- क्या सरकार डिफेंस, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और MSME सेक्टर के लिए कोई बड़ा बूस्टर देगी? क्या टैक्स और कैपेक्स पर ऐसे ऐलान होंगे जो खपत और निवेश दोनों को रफ्तार दें? और क्या यह बजट भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को एक ठोस रोडमैप देगा?

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क्यों खास है यह बजट

यह बजट कई मायनों में खास है. यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा और स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार को पेश किया जा रहा है. ऐसे समय में जब घरेलू मांग बनी हुई है. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. यह बजट संतुलन साधने की बड़ी परीक्षा होगा.

किस वर्ग को क्या मिल सकता है

किसान: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए किसानों को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. PM-Kisan योजना की किस्त बढ़ाने, खाद-बीज पर सब्सिडी जारी रखने और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की मांग प्रमुख है. इसके अलावा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी पर भी ठोस घोषणा की आस है.

युवा: युवाओं की निगाहें रोजगार सृजन और भविष्य की संभावनाओं पर टिकी हैं. वे नई नौकरियों के अवसर, स्टार्टअप्स के लिए सरकारी सहायता और स्किल डेवलपमेंट के लिए बड़े बजट आवंटन की उम्मीद कर रहे हैं. इसके साथ ही, एजुकेशन लोन पर ब्याज दरों में राहत की मांग भी जोर पकड़ रही है.

महिलाएं: महिलाओं को उम्मीद है कि उज्ज्वला जैसी कल्याणकारी योजनाओं का दायरा और बढ़ेगा. महिला उद्यमियों के लिए सस्ते और आसान लोन, साथ ही कामकाजी महिलाओं के लिए विशेष टैक्स छूट जैसे कदम बजट का अहम हिस्सा बन सकते हैं.

मध्यम वर्ग: बजट से सबसे ज्यादा उम्मीदें मिडिल क्लास को हैं. इनकम टैक्स में राहत, टैक्स स्लैब में बदलाव और होम लोन के ब्याज पर डिडक्शन की सीमा बढ़ाने की मांग प्रमुख है, ताकि घर खरीदना और ईएमआई चुकाना आसान हो सके.

किन सेक्टर्स पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

बजट 2026 को लेकर बाजार और उद्योग जगत की निगाहें कुछ चुनिंदा सेक्टर्स पर टिकी हुई हैं जहां सरकार की नीतियां सीधे तौर पर ग्रोथ और निवेश की दिशा तय कर सकती हैं. इस बार बजट में मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, MSME और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अहम घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है.

डिफेंस

डिफेंस सेक्टर हर बजट की तरह इस बार भी फोकस में रह सकता है. मौजूदा जियो-पॉलिटिकल हालात और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के चलते रक्षा उत्पादन और घरेलू खरीद को बढ़ावा देने वाले कदमों पर निवेशकों की नजर रहेगी. बाजार पहले ही डिफेंस बजट में 8–10% बढ़ोतरी को एक संतुलित संकेत मान रहा है, लेकिन असली फोकस ऑर्डर फाइनलाइजेशन और एक्जीक्यूशन टाइमलाइन पर रहेगा.

रेलवे

रेलवे सेक्टर भी सरकार के कैपेक्स एजेंडे का मजबूत स्तंभ बना हुआ है. ट्रैक अपग्रेडेशन, सिग्नलिंग सिस्टम और सेमी-हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए अतिरिक्त आवंटन की संभावना जताई जा रही है. पिछले साल आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है, ऐसे में इस बार भी रेलवे के लिए निरंतरता की उम्मीद है.

इंफ्रास्ट्रक्चर

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सरकार बड़े ऐलानों से ज्यादा एक्जीक्यूशन पर जोर दे सकती है. सड़क, पावर, डिफेंस और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में पब्लिक कैपेक्स जारी रहने की संभावना है, जिससे बड़ी इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स कंपनियां फोकस में रहेंगी.

EV, ऑटो और ग्रीन एनर्जी से क्या उम्मीदें?

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब प्रयोग के चरण से आगे निकल चुकी है. EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और लोकल वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए समर्थन जारी रहने की उम्मीद है. वहीं ऑटो सेक्टर में टैक्स ढांचे की स्थिरता, बेहतर अफोर्डेबिलिटी और मांग में धीरे-धीरे सुधार पर सरकार का रुख अहम रहेगा.

रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी Budget 2026 का बड़ा थीम हो सकती है. सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नीतिगत स्पष्टता और फंडिंग पर बाजार की नजर रहेगी.

एक्सपोर्ट, MSME और कंजम्पशन पर फोकस

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स के लिए PLI और क्रेडिट सपोर्ट बढ़ाए जाने की उम्मीद है.
MSME सेक्टर को लेकर उद्योग टैक्स राहत, आसान क्रेडिट और कंप्लायंस में सरलीकरण की मांग कर रहा है.
वहीं, कंजम्पशन को रफ्तार देने के लिए टैक्स और वेलफेयर से जुड़े उपाय बजट की अहम कड़ी हो सकते हैं.

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