
उर्जित पटेल का बड़ा दांव: अब IMF में भारत की आवाज़ बनेंगे!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार का अहम फैसला: अब IMF में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे उर्जित पटेल-सरकार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है, पूर्व आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति अगले तीन सालों के लिए होगी। आपको बता दें कि इस पद पर वे के वी सुब्रमणियन की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल सरकार ने कुछ समय पहले ही खत्म कर दिया था। 28 अगस्त 2025 से उर्जित पटेल इस नई जिम्मेदारी को संभालेंगे, जो कि भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
IMF बोर्ड में भारत की भूमिका और पटेल की अहमियत-अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कार्यकारी बोर्ड कुल 25 डायरेक्टर्स से मिलकर बनता है, और हर डायरेक्टर किसी देश या देशों के समूह का प्रतिनिधित्व करता है। भारत भी इस बोर्ड का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अकेले नहीं। भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे देश भी इसी समूह में शामिल हैं। ऐसे में, इस पूरे समूह की तरफ से IMF में अपनी बात रखने वाले एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका बहुत खास हो जाती है। अब उर्जित पटेल यही जिम्मेदारी निभाएंगे और भारत समेत इस पूरे समूह की आवाज़ को IMF तक पहुंचाएंगे।
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) में भी संभाली थी अहम जिम्मेदारी-IMF में आने से पहले, उर्जित पटेल एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) में वाइस प्रेसिडेंट फॉर इन्वेस्टमेंट ऑपरेशंस (रीजन-1) के पद पर काम कर रहे थे। उन्होंने जनवरी 2024 तक यह पद संभाला, लेकिन पारिवारिक स्वास्थ्य कारणों से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बीजिंग स्थित इस बैंक में उनका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश से जुड़ा था, जिससे उन्हें वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और नीतियों की गहरी समझ मिली। यह अनुभव निश्चित रूप से IMF में उनके काम आएगा।
RBI गवर्नर के तौर पर यादगार कार्यकाल और इस्तीफे की वजह-उर्जित पटेल को साल 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का 24वां गवर्नर बनाया गया था। उन्होंने रघुराम राजन के बाद यह पद संभाला था। हालांकि, दिसंबर 2018 में उन्होंने अचानक गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसा माना जाता है कि सरकार और RBI के बीच डिविडेंड ट्रांसफर को लेकर कुछ मतभेद थे, जिसकी वजह से उन्होंने यह फैसला लिया। गवर्नर बनने से पहले पटेल RBI में डिप्टी गवर्नर भी रह चुके थे, जहाँ वे मौद्रिक नीति और आर्थिक शोध जैसे महत्वपूर्ण विभागों को देख रहे थे।
सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों का गहरा अनुभव-पटेल का करियर सिर्फ RBI या IMF तक ही सीमित नहीं रहा है। उन्होंने 1998 से 2001 तक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया है। इसके अलावा, उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDFC लिमिटेड, MCX लिमिटेड और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी बड़ी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इस तरह, उनका अनुभव सार्वजनिक और निजी, दोनों ही क्षेत्रों में फैला हुआ है, जो उन्हें इस नई भूमिका के लिए एक बहुत ही मजबूत उम्मीदवार बनाता है।
शिक्षा और शुरुआती करियर: एक शानदार पृष्ठभूमि-1963 में जन्मे उर्जित पटेल की शिक्षा बहुत ही प्रतिष्ठित संस्थानों से हुई है। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से इकोनॉमिक्स में अपनी बैचलर डिग्री हासिल की। इसके बाद, 1986 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल किया और 1990 में येल यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में ही काम करना शुरू किया और 1990 से 1995 तक वहां सेवाएं दीं। उस दौरान उन्होंने अमेरिका, भारत, बहामास और म्यांमार जैसे देशों के लिए काम किया।
IMF में यह पद भारत के लिए क्यों है खास?-IMF जैसी बड़ी वैश्विक वित्तीय संस्था में भारत का प्रतिनिधित्व करना किसी भी भारतीय अर्थशास्त्री के लिए एक बहुत बड़े सम्मान की बात है। उर्जित पटेल का यह नया कार्यकाल भारत की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी मज़बूत करेगा। उनके पास न केवल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में काम करने का लंबा अनुभव है, बल्कि उन्होंने सरकारी और निजी, दोनों ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। ऐसे में, भारत और उसके पड़ोसी देशों के लिए यह नियुक्ति एक बहुत ही सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

