
वेदांता ने BJP को दिए ₹97 करोड़: 2025 में चार गुना बढ़ा राजनीतिक चंदा, कांग्रेस को मिला सिर्फ ₹10 करोड़
राजनीतिक दलों को चंदा: वेदांता का बड़ा योगदान-यह लेख वेदांता लिमिटेड द्वारा राजनीतिक दलों को दिए गए भारी भरकम चंदे के बारे में है। कंपनी ने 2024-25 में कुल ₹157 करोड़ का चंदा दिया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा-सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को हुआ है, जिसे ₹97 करोड़ मिले हैं। यह पिछले साल के ₹26 करोड़ से लगभग चार गुना ज्यादा है। इससे साफ है कि वेदांता का झुकाव किस तरफ है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस को केवल ₹10 करोड़ मिले हैं, जबकि पिछले साल उसे ₹49 करोड़ मिले थे। इसमें भारी कमी क्यों आई है, यह सवाल खड़ा होता है।
क्षेत्रीय दलों को भी नहीं भूली वेदांता-वेदांता ने केवल राष्ट्रीय दलों को ही नहीं, क्षेत्रीय दलों को भी चंदा दिया है। बीजू जनता दल (BJD) को ₹25 करोड़ और झारखंड मुक्ति मोर्चा को ₹20 करोड़ का योगदान दिया गया है। यह योगदान कंपनी के ‘विविध व्यय’ के मद में दर्ज किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि वेदांता अपनी रणनीति में कितना सक्रिय है।
इलेक्टोरल बॉन्ड से भी दिया था भारी चंदा-पिछले पाँच वर्षों में वेदांता ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए ₹457 करोड़ राजनीतिक दलों को दिए थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद भी, कंपनी की राजनीतिक चंदा देने की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। अब यह चंदा सीधे राजनीतिक दलों को दिया जा रहा है।
अन्य खर्चे भी हैं ध्यान देने योग्य-वेदांता ने अपने पैरेंट फर्म वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड को ब्रांड और रणनीतिक सेवाओं के लिए ₹2,397 करोड़ का भुगतान किया है। इसमें से ₹582 करोड़ हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और FACOR को सब-लाइसेंसिंग फीस के रूप में दिए गए हैं। यह खर्च भी काफी ध्यान देने योग्य है।
बड़ी कंपनियों के अपने ‘इलेक्टोरल ट्रस्ट’-वेदांता का ‘जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट’ कई ऐसे ट्रस्टों में से एक है जिनके माध्यम से बड़ी कंपनियां राजनीतिक दलों को चंदा देती हैं। टाटा, रिलायंस, भारती, बिरला, बजाज और महिंद्रा जैसे समूहों के भी अपने-अपने ट्रस्ट हैं जो राजनीति में धन लगाते हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है।
