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तीन कटौतियों के बाद भी RBI ने क्यों नहीं घटाई ब्याज दरें? महंगाई गिरने के बावजूद बड़ा फैसला

RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया!-भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी तीसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में बड़ा फैसला लिया है – रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं! लगातार तीन बार दरें घटाने के बाद, इस बार RBI ने 5.5% पर रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के चलते ये फैसला लिया गया है।

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 महंगाई में कमी, विकास दर बरकरार-RBI ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया है। फरवरी से ही महंगाई 4% से नीचे है, और जून में तो यह छह साल के निचले स्तर 2.1% पर पहुँच गई। इसमें सबसे बड़ी भूमिका खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट और बेस इफेक्ट की रही। हालांकि, RBI ने FY26 के लिए विकास दर का अनुमान 6.5% पर ही बनाए रखा है। मतलब, RBI को भरोसा है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने से आर्थिक विकास पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

 खाद्य पदार्थों के दामों में गिरावट से मिली राहत-जून में खाद्य महंगाई -1.06% पर पहुँच गई, जो मई में 0.99% थी। सब्जियों, दालों, मांस-मछली, अनाज, चीनी, दूध और मसालों जैसे रोजमर्रा के सामानों के दाम कम होने से CPI में राहत मिली है। क्योंकि CPI बास्केट में खाद्य पदार्थों का वजन लगभग 50% है, इसलिए इन दामों में गिरावट का सीधा असर कुल महंगाई पर पड़ा है। लेकिन, RBI अभी भी सावधान है क्योंकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतें कभी भी बढ़ सकती हैं।

 कौन तय करता है रेपो रेट?-रेपो रेट और मौद्रिक नीति से जुड़े सभी अहम फैसले रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) लेती है। इसमें छह सदस्य होते हैं – तीन RBI से और तीन बाहरी विशेषज्ञ। इस बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया।

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