सेहत

सालों से दूध पीते आए बड़े-बुजुर्गों को अब दूध पीने से मना क्यों करते हैं डॉक्टर? जानें किस उम्र तक पीना चाहिए दूध

दादी-नानी के समय से ही बच्चों को दूध, दही और घी खाने-पीने की सलाह दी जाती रही है। भारतीय घरों में दूध को सेहत और मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक कई लोग रोजाना दूध पीते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों को दूध पचाने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बुजुर्गों को दूध पीना बंद कर देना चाहिए? क्या दूध सिर्फ बच्चों के लिए जरूरी है या बड़े लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं? आइए जानते हैं कि उम्र के हिसाब से दूध पीना कितना फायदेमंद हो सकता है।

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हड्डियों की मजबूती के लिए क्यों जरूरी है दूध?

दूध कैल्शियम, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और उनकी मरम्मत के लिए जरूरी होता है।

बचपन और किशोरावस्था में शरीर का विकास तेजी से होता है। इस दौरान पर्याप्त कैल्शियम और प्रोटीन लेना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार संतुलित आहार के साथ दूध दिया जा सकता है।

हालांकि, एक साल से कम उम्र के शिशुओं को गाय या भैंस का दूध मुख्य पेय के रूप में नहीं देना चाहिए। इस उम्र में मां का दूध या जरूरत के अनुसार शिशु फॉर्मूला अधिक उपयुक्त होता है।

बड़े-बुजुर्गों को कब तक पीना चाहिए दूध?

दूध पीने की कोई निश्चित ऊपरी उम्र नहीं होती। वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी दूध पोषण का अच्छा विकल्प हो सकता है। बढ़ती उम्र में हड्डियों का घनत्व कम होने और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और प्रोटीन मिलना जरूरी है।

दूध इन पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। हालांकि, सिर्फ दूध पीने से हड्डियों से जुड़ी सभी समस्याओं को रोका नहीं जा सकता। इसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त विटामिन डी, नियमित शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी देखभाल भी महत्वपूर्ण है।

किन लोगों को दूध पीने से बचना चाहिए?

हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। कुछ लोगों को दूध पीने के बाद पेट फूलना, गैस, पेट में दर्द या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसकी एक वजह लैक्टोज इनटॉलरेंस हो सकती है, जिसमें शरीर दूध में मौजूद लैक्टोज को ठीक से पचा नहीं पाता।

वहीं, कुछ लोगों को दूध के प्रोटीन से एलर्जी भी हो सकती है। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दूध से परहेज करने या उपयुक्त विकल्प चुनने की जरूरत पड़ सकती है।

यदि सामान्य दूध पीने से परेशानी होती है, तो लैक्टोज-फ्री दूध या कैल्शियम से भरपूर दूसरे खाद्य पदार्थ विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, दूध से एलर्जी होने पर लैक्टोज-फ्री दूध भी सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता, क्योंकि उसमें दूध के प्रोटीन मौजूद रह सकते हैं।

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क्या बढ़ती उम्र में दूध पीना बंद कर देना चाहिए?

इसका जवाब है—नहीं, सिर्फ उम्र बढ़ने के कारण दूध पीना बंद करना जरूरी नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को दूध पचाने में परेशानी नहीं होती और उसे इससे एलर्जी नहीं है, तो वह अपनी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार जीवनभर दूध पी सकता है।

जरूरी यह है कि दूध को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए और उसकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जरूरतों के हिसाब से तय की जाए। यदि दूध से बार-बार परेशानी होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उचित सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष: दूध केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। दूध पीने की कोई तय ऊपरी उम्र नहीं है। सही मात्रा, संतुलित आहार और व्यक्ति की सेहत के अनुसार इसका सेवन करना सबसे महत्वपूर्ण है।

News Desk

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