
इस हफ़्ते शेयर बाज़ार में क्या है ख़ास?-इस हफ़्ते शेयर बाज़ार में सबकी निगाहें रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के फैसले पर टिकी हैं। RBI का फैसला ब्याज दरों, महंगाई और बाज़ार में पैसों की उपलब्धता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, जिसका असर शेयर बाज़ार की चाल पर साफ़ दिखेगा। जानकारों का मानना है कि RBI के फैसले से बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के साथ-साथ पूरे शेयर बाज़ार की दिशा तय हो सकती है। साथ ही, विदेशी निवेशकों का रुख़ और दुनिया के बाकी बाज़ारों की स्थिति भी निवेशकों के मनोबल को प्रभावित करेगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बड़ी कंपनियों के नतीजे: सेक्टर में हलचल-इस हफ़्ते कई बड़ी कंपनियों के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे आने वाले हैं। इनमें भारती एयरटेल, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, टाटा मोटर्स, डीएलएफ, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और एलआईसी जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजे न केवल उनके शेयरों में उतार-चढ़ाव लाएंगे बल्कि पूरे सेक्टर के मूड को भी प्रभावित करेंगे। अगर नतीजे अच्छे आए तो बाज़ार को मज़बूती मिलेगी, वरना गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
अमेरिका के टैरिफ़ और कच्चे तेल की कीमतें: अहम फैक्टर-पिछले हफ़्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ़ लगाने का ऐलान किया था, जिससे बाज़ार का माहौल ख़राब हो गया था। ऊर्जा और रक्षा व्यापार पर जुर्माना लगाने से भी निवेशक घबरा गए थे। अब देखना है कि भारत और अमेरिका के बीच अगली बातचीत में क्या राहत मिलती है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और दुनिया के कारोबार के आँकड़े भी इस हफ़्ते बाज़ार की चाल को प्रभावित करेंगे।
पिछले हफ़्ते बड़ी गिरावट: इस हफ़्ते क्या होगा?-पिछले हफ़्ते सेंसेक्स में 863 अंक और निफ़्टी में 272 अंक की गिरावट देखी गई थी। जानकारों का कहना है कि फ़िलहाल बाज़ार स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। निवेशक RBI के फैसले और कंपनियों के नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगर RBI से अच्छे संकेत मिले और अमेरिका के टैरिफ़ पर बातचीत में राहत मिले, तो बाज़ार में फिर से स्थिरता आ सकती है।
विदेशी निवेशक और दुनिया के बाज़ार: निवेशकों की चिंता-विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाज़ार पर दबाव बना हुआ है। दुनिया के बाकी शेयर बाज़ारों में भी उतार-चढ़ाव जारी है, जिसका असर भारतीय बाज़ार पर पड़ रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर दुनिया के बाज़ारों में स्थिरता आए और भारत-अमेरिका वार्ता से अच्छे नतीजे निकलें, तो विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाज़ार में दिलचस्पी दिखा सकते हैं। फ़िलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

