
गलत पोस्चर में एक्सरसाइज करना पड़ सकता है भारी, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान
Wrong Exercise Posture Risks: फिट रहने की चाहत आज के समय में युवाओं की पहली पसंद है. इसके लिए लोग जिम जाते हैं. जो लोग जिम नहीं जा पाते, वे घर पर ही एक्सरसाइज करते हैं. लेकिन एक्सरसाइज तभी फायदेमंद होती है, जब उसे सही तरीके और सही पोस्चर के साथ किया जाए. गलत पोस्चर में की गई कसरत फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है. आइए जानते हैं कि एक्सरसाइज के दौरान गलत पोस्चर से सेहत पर क्या असर पड़ता है.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: गलत तरीके से वर्कआउट करने पर मसल्स पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है. इससे गर्दन, कंधे, घुटने और कमर में दर्द हो सकता है. मसल स्ट्रेन या खिंचाव आ सकता है. लंबे समय तक जकड़न बनी रह सकती है.
रीढ़ की हड्डी को नुकसान: गलत पोस्चर में स्क्वाट, डेडलिफ्ट या योगासन करने से स्पाइन पर गलत दबाव पड़ता है. इससे स्लिप डिस्क की समस्या हो सकती है. कमर दर्द बढ़ सकता है. शरीर का पोस्चर बिगड़ सकता है, जैसे झुककर चलना या बैठना.
चोट लगने का खतरा बढ़ता है: गलत बैलेंस और मूवमेंट की वजह से मोच आ सकती है. लिगामेंट इंजरी हो सकती है. अचानक गिरने का खतरा रहता है. जिम में भारी वजन उठाते समय यह जोखिम ज्यादा होता है.
सांस लेने में दिक्कत: एक्सरसाइज के दौरान गलत बॉडी पोजिशन से सांस सही तरीके से नहीं आती. जल्दी थकान होती है. चक्कर या घबराहट महसूस हो सकती है. योग और कार्डियो एक्सरसाइज में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है.
एक्सरसाइज का पूरा फायदा नहीं मिलता: गलत पोस्चर में करने से सही मसल्स एक्टिव नहीं होतीं. वजन कम करने या मसल बनाने का असर कम हो जाता है. मेहनत ज्यादा होती है, लेकिन रिजल्ट कम मिलता है.
लंबे समय में शरीर की बनावट बिगड़ सकती है: लगातार गलत पोस्चर में एक्सरसाइज करने से शरीर का बैलेंस बिगड़ सकता है. कंधे आगे की ओर झुक सकते हैं. पेट और कमर की शेप खराब हो सकती है.
सही पोस्चर क्यों जरूरी है
- चोट से बचाव होता है.
- बेहतर रिजल्ट मिलता है.
- मसल्स और हड्डियां मजबूत होती हैं.
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है.
कुछ जरूरी टिप्स
- शुरुआत में ट्रेनर या एक्सपर्ट से सीखें.
- शीशे के सामने एक्सरसाइज करें.
- हल्के वजन से शुरुआत करें.
- दर्द हो तो तुरंत रुक जाएं.
- वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर करें.

