छत्तीसगढ़

राजकुमार कॉलेज में गरिमा संग मना 130वां वार्षिक पुरस्कार समारोह

जतिन नचरानी

रायपुर। अपनी गौरवशाली परंपरा, अनुशासन और कालजयी मूल्यों को सहेजते हुए राजकुमार कॉलेज, रायपुर ने विद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक जशपुर हॉल में 130वां वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह अत्यंत गरिमा और उत्साह के साथ मनाया। यह आयोजन न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का उत्सव रहा, बल्कि विद्यालय की समृद्ध विरासत और सर्वांगीण शिक्षा दृष्टिकोण का भी सजीव प्रतिबिंब बना।
समारोह का शुभारंभ पंच देव मंदिर में विधिवत प्रार्थना अर्पण के साथ हुआ, जिससे वातावरण श्रद्धा और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण हो गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजा कृष्ण देवराय की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई। संस्कृति, कला और शिक्षा के प्रति उनके योगदान और संरक्षण ने इस अवसर को विशेष महत्व प्रदान किया। शासन मंडल के सदस्यों से औपचारिक परिचय के पश्चात मुख्य अतिथि ने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड आॅफ आॅनर स्वीकार किया। इसके उपरांत सभी अतिथि मुख्य कार्यक्रम हेतु जशपुर हॉल पहुंचे। औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत सारे जहां से अच्छा से हुई, जिसने समूचे सभागार को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया, जबकि वाद्य वृंद की मनमोहक प्रस्तुति और विद्यालय गीत ने समारोह में नई ऊर्जा और आत्मीयता का संचार किया।
विद्यालय के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल अविनाश सिंह (वेटरन) ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक, सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों एवं खेलकूद में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने कहा कि राजकुमार कॉलेज का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाना है। समारोह का मुख्य आकर्षण पुरस्कार वितरण रहा, जिसमें मुख्य अतिथि ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। अपने संबोधन में राजा कृष्ण देवराय ने राजकुमार कॉलेज को देश के श्रेष्ठ पब्लिक स्कूलों में से एक बताते हुए इसकी अनुशासित परंपरा, हरित परिसर, मजबूत मूल्य प्रणाली और खेल संस्कृति की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन प्रबंध समिति के अध्यक्ष महाराजा टी. एस. सिंह देव, सरगुजा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। राष्ट्रगान एवं स्मृति-चित्र सत्र के पश्चात मुख्य अतिथि ने कला एवं शिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। सायंकाल आयोजित पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ यह ऐतिहासिक समारोह प्रेरणा और गौरव के भाव के साथ संपन्न हुआ।

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