
India Canada Trade Deal: भारत बनेगा ग्लोबल बिजनेस का किंग, EU के बाद ब्राजील और कनाडा के साथ होगी ट्रेड डील
नई दिल्ली। दुनिया की आर्थिक और व्यापारिक राजनीति तेजी से नए संतुलन की ओर बढ़ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों, ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित व्यापार रुख ने वैश्विक साझेदारों को वैकल्पिक रणनीतियों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी बदलाव के केंद्र में भारत एक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई देश अब पारंपरिक वेस्ट-सेंट्रिक आर्थिक मॉडल से दूरी बनाकर पश्चिम-पूर्व आर्थिक धुरी की ओर बढ़ रहे हैं। इस नई वैश्विक संरचना में भारत को दीर्घकालिक विकल्प और रणनीतिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता इस कड़ी का अहम हिस्सा है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी देश यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वह भारत के अन्य देशों से संबंधों पर वीटो लगाए। यही नीति आज भारत को बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का एक प्रमुख केंद्र बना रही है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च में भारत दौरा
अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा कनाडा भी अपनी विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे की तैयारी कर रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी और उसे 51वां अमेरिकी राज्य कहकर विवाद खड़ा कर दिया।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा अगले महीने आएंगे भारत
ग्लोबल साउथ के देशों के बीच भी भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फरवरी में भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय उद्योगपतियों से व्यापक बातचीत करेंगे। यह दौरा इस बात का संकेत है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक साझेदार के रूप में देख रही हैं
भारत-यूरोपीय संघ FTA से बदलेगा खेल
इस वैश्विक बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता है, जिस पर 26 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। यह समझौता दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब दो अरब लोगों को आपस में जोड़ता है।
समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत को निर्यात किए जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या समाप्त करेगा, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से 93 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क हटाएगा। इससे भारत में यूरोपीय कारें, वाइन, चॉकलेट और प्रोसेस्ड फूड सस्ते होंगे, वहीं भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और आईटी उत्पादों को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा।

