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हमीरपुरः महाभारत कालीन चौपेश्वर शिवमंदिर में महाशिवरात्रि पर दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें

महाराज की पुत्री राजकुमारी उत्तरा शिव लिंग में करती थी जलाभिषेक – महाशिवरात्रि पर्व पर उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब हमीरपुर, 14 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वीरभूमि बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले का राठ नगर महाभारत काल से जुड़ा है। इसे महाराजा विराट की राजधानी से भी जाना जाता रहा है। राठ को पहले विराट नगर कहा जाता था लेकिन समय बीतने के साथ ये अब राठ नगर के नाम से विख्यात है। यहां महाराज विराट ने अपनी बेटी उत्तरा के लिये चौपेश्वर शिव मंदिर का निर्माण कराया था जहां उत्तरा नित्य मंदिर में जाकर भोले नाथ के शिवलिंग का जलाभिषेक करती थी। महाशिवरात्रि पर्व पर इस एतिहासिक मंदिर को खूब सजाया गया है। यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते है। महाशिवरात्रि पर्व पर इस मंदिर में दिन भर अनुष्ठान होंगे। इसके लिये तैयारियां शुरू कर दी गयी है।

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हमीरपुर जिला मुख्यालय से करीब 85 किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित राठ नगर आज भी अपने अतीत और वैभव को संजोये है। महाभारत काल में ये नगर विराट नगर के नाम से जाना जाता था। महाराज विराट ने अपनी पुत्री उत्तरा को पूजा अर्चना करने के लिये एक भव्य मंदिर का निर्माण कराकर शिव लिंग की स्थापना करायी थी। इस मंदिर में खाकी बाबा के नाम से एक संत ने डेरा डाला था। किसी जमाने में यहां एक मर्तबा यज्ञ का आयोजन हुआ था। अगले दिन यज्ञ सम्पन्न होने के बाद भंडारे का आयोजन किया गया था जिसमें रात में पूड़ी बनाने के लिये घी कम पड़ गया। इस संत ने शिष्यों से चौपेश्वर मंदिर के तालाब से पानी भरकर कढ़ाई में डालने का फरमान दिया। बताते हैं कि जैसे ही चौपेश्वर तालाब का पानी भरकर कढ़ाई में डाला गया तो वह घी बन गया था। बाद में संत के कहने पर मार्केट से एक डिब्बा (टीन) शुद्ध घी खरीदकर चौपेश्वर तालाब में डलवाया गया था। इस एतिहासिक चौपेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व की धूम शुरू हो गयी है। रविवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। मंदिर में भजन कीर्तन और अनुष्ठान का दौर चलेगा। इसके लिये मंदिर को खूब सजाया गया है।

हजारों बरस पुराना है राठ नगर का इतिहासहमीरपुर जिला का राठ नगर एतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैै क्योंकि ये नगर महाभारत काल में महाराजा विराट की राजधानी थी। उन्हीं के नाम से यह नगर विराट नगर जाना जाता रहा है। 12 बरस के अज्ञातवास में युधिष्ठर, भीम, अर्जुन नकुल व सहदेव यहां आये थे। जाने माने इतिहासकार राकेश त्रिपाठी के मुताबिक अज्ञातवास बिताने के लिये पांच पाण्डवों ने महाराज विराट की नगरी राठ को ही चुना था। पाण्डवों ने अपने सभी शस्त्र नगर के बाहर एक विशाल वृक्ष पर छिपा दिये थे।

विराट के रसोईयां बने थे भीम यहीं पर भीम ने द्रोपदी पर बुरी नजर डालने वाले कीचक को मौत के घाट उतारा था। युधिष्ठर राजा विराट के सभासद व भीम रसोईयां बने थे। नकुल घुड़साल की देखरेख करते थे वहीं सहदेव महाराजा की गायों की सेवा करते थे।

विराट की बेटी उत्तरा को अर्जुन सिखाते थे नृत्यबताते है कि अर्जुन महाराज विराट की बेटी उत्तरा को नृत्य सिखाते थे। पांचों पाण्डवों की मां द्रोपदी को महारानी की दासी बनना पड़ा था। अर्जुन बृहन्नला बनकर नृत्य करते थे। युधिष्ठर राजा विराट के सभासद व भीम रसोईयां बने थे। नकुल घुड़साल की देखरेख करते थे वहीं सहदेव महाराजा की गायों की सेवा करते थे। अर्जुन बृहन्नला बनकर नृत्य करते थे। बताते हैं कि अर्जुन महाराज विराट की बेटी उत्तरा को नृत्य की सिखाते थे। पांचों पाण्डवों की मां द्रोपदी को महारानी की दासी बनना पड़ा था।

चौपेश्वर मंदिर के दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें राठ बस स्टैण्ड से 1.8 किमी दूर नगर से पूर्व की ओर एक एतिहासिक प्राचीन मंदिर है जो चौपेश्वर मंदिर के नाम से विख्यात है। इसमें भगवान शंकर का भव्य शिवलिंग स्थापित है जो किसी जमाने में चौपेश्वर महाराजा के नाम से भी सुविख्यात रहा है। मंदिर में हनुमानजी, रामलला व भगवान गणेश जी के भी मंदिर है। महाराजा विराट ने अपनी बेटी उत्तरा के देव पूजन के लिये ही मंदिर का निर्माण कराकर शिवलिंग की स्थापना करायी थी। महाराजा विराट की पुत्री राजकुमारी उत्तरा इसी मंदिर में पूजा और अर्चना करती थी।

चौपरा तालाब पर उत्तरा सीखती थी नृत्य चौपेश्वर मंदिर से लगा हुआ एक प्राचीन तालाब है जिसे चौपरा तालाब के नाम से जाना जाता है। यह तालाब भी महाभारत कालीन है। इस तालाब के बारे में बताया जाता है कि अज्ञातवास में अर्जुन ने राजकुमारी उत्तरा को इसी तालाब के तट पर नृत्य की शिक्षा दी थी। यह तालाब आज भी महाभारत काल की गाथा संजोये है प्रशासनिक उदासीनता के कारण तालाब के चारो ओर अतिक्रमण हो गया है। इस तालाब के अतिक्रमण को लेकर स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे है।

बारह खंभा में लगता था महाराज का दरबारराठ नगर के पश्चिम दिशा की ओर नर्सरी परिसर के अंदर बारह खंभों का एक आयताकार बरामदा जैसा भवन बना है साथ ही मझगवां रोड में भी बारह खंभों का आयताकार बरामदा बना है। इसे बारह खंभा चौराहा भी कहा जाता है। इसी जगह महाराजा विराट का दरबार लगता था। वह अपने प्रजा की समस्यायें निस्तारित करते थे। इसकी कलाकृतियां भी अनोखी है। पत्थरों को काटकर बारह खंभे निर्मित किये गये। पत्थरों से ही इन खंभों को आपस में जोड़ा गया है। बारह खंभा के निर्माण में सीमेंट, गारा का प्रयोग नहीं किया गया है।

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