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मध्यप्रदेश

MP में वन्य जीवों की बंपर बढ़ोतरी! चीतों की संख्या 35 पार, हाथी पर्यटन की तैयारी, CM के निर्देशों से बदलेगी तस्वीर

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्यों के परिणामस्वरूप वन्य जीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में मानव-वन्य जीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए जनता को जागरूक करना और आवश्यक सतर्कता उपायों की जानकारी देना जरूरी है।

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मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 31वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने वन विभाग को पर्यटन विभाग के साथ समन्वय कर वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूली बच्चों को वन और वन्य जीवों से जोड़ने के लिए संचालित ‘अनुभूति कार्यक्रम’ का विस्तार कर अधिक से अधिक स्कूलों को इसमें शामिल करने पर जोर दिया।

हाथी पर्यटन और विविधता पर जोर
बैठक में प्रदेश में बढ़ती हाथियों की संख्या को देखते हुए हाथी-केंद्रित पर्यटन गतिविधियां विकसित करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों को दिए जा रहे वन्य जीवों के बदले वहां से भी वन्य जीव लाकर प्रदेश में जैव विविधता बढ़ाई जाए।

हर पंचायत में सर्पदंश प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने सर्पदंश की घटनाओं में जान बचाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दो व्यक्तियों को सांप पकड़ने और प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। साथ ही सांपों से संबंधित जागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया।

वन्य जीव संरक्षण में उपलब्धियां
बैठक में जानकारी दी गई कि गांधी सागर अभयारण्य, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और कूनो नेशनल पार्क में 846 कृष्ण मृग और 67 नीलगायों का सफल पुनर्स्थापन किया गया। वन विहार नेशनल पार्क भोपाल से 6 मगरमच्छों को ओंकारेश्वर क्षेत्र में छोड़ा गया। पेंच टाइगर रिजर्व से एक मादा बाघ राजस्थान भेजी गई। असम से 50 जंगली भैंसें, गेंडे का जोड़ा और किंग कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। नामीबियाई मादा चीता ‘आशा’ ने 5 शावकों को जन्म दिया, प्रदेश में चीतों की संख्या अब 35 हो गई है।

वन क्षेत्र विस्तार और संरक्षण
बैठक में बगदरा अभयारण्य, संजय टाइगर रिजर्व (सीधी) के बफर जोन विस्तार सहित पन्ना टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान से जुड़े प्रस्तावों को अनुमोदन दिया गया। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों और संस्थाओं को वन एवं वन्य जीव अध्ययन से जोड़ने, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए वन और पुरातत्व विभाग के समन्वय की कार्यशाला आयोजित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव वन संदीप यादव सहित वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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