
बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव
जिम करते-करते अचानक मौत, खेलते समय दिल की धड़कन रुक जाना या नाचते-गाते जिंदगी का थम जाना—COVID-19 के बाद और सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी घटनाएं तेजी से सामने आई हैं। इन मामलों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और दिल की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या किया जाए, यह आज हर किसी के लिए अहम मुद्दा बन चुका है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लाइफस्टाइल बन रही सबसे बड़ी वजह
इंस्टिट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीजेज (IHLD) के चेयरमैन और कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर राहुल चंदोला के मुताबिक खराब जीवनशैली हार्ट संबंधी बीमारियों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उन्होंने बताया कि संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद और तनाव से बचाव दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही 40 की उम्र के बाद नियमित हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग कराना भी अनिवार्य हो जाता है।
बिना चेतावनी के आते हैं 50% हार्ट अटैक
विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 50% हार्ट अटैक के मामले ऐसे होते हैं जिनमें पहले कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। यही वजह है कि लोग अक्सर समय रहते सावधानी नहीं बरत पाते। ऐसे में नियमित जांच और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
खराब आदतें बढ़ा रही हैं खतरा
कम नींद लेना, ज्यादा तनाव में रहना, अनियमित दिनचर्या, प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और एक्सरसाइज की कमी—ये सभी दिल की बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। कई शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आधुनिक जीवनशैली हार्ट हेल्थ पर सीधा असर डाल रही है।
रोजमर्रा की आदतों में करें बदलाव
दिल को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान लेकिन असरदार आदतें अपनाई जा सकती हैं। रोजाना 7 से 7:30 घंटे की पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर और दिल दोनों को आराम देती है। इसके साथ ही नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करना चाहिए, जिससे शरीर सक्रिय रहता है और पसीना निकलने से फिटनेस बनी रहती है। हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। वहीं, समय पर और संतुलित आहार लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सही खानपान दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।
प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप की बढ़ती अहमियत
डॉक्टर राहुल चंदोला, जो iLiveConnect के फाउंडर भी हैं, बताते हैं कि अब लोग बीमारी के बाद ही नहीं, बल्कि पहले से ही जांच कराने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ईसीजी, इको और ब्लड टेस्ट जहां सामान्य जानकारी देते हैं, वहीं एंजियोग्राफी दिल की स्थिति का अधिक सटीक आकलन करती है, हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल और असुविधाजनक हो सकती है।
नई तकनीक से आसान हो रही निगरानी
हार्ट हेल्थ की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब नई तकनीक का सहारा भी लिया जा रहा है। iLive Connect का बायोसेंसर डिवाइस शरीर पर पैच की तरह लगाया जाता है, जो लगातार 5 दिनों तक 24 घंटे व्यक्ति की गतिविधियों के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी करता है और सटीक रिपोर्ट देता है।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता और समय पर सावधानी है। यदि लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें और नियमित जांच कराएं, तो हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

