छत्तीसगढ़

नन्हे शिक्षकों की बड़ी पहल: एम्पीरिया सैफायर के बच्चों ने गाँव के संग साझा किए कला के रंग

रायपुर | जहाँ गर्मियों की छुट्टियों का मतलब अक्सर खेल-कूद और मनोरंजन होता है, वहीं रायपुर की एम्पीरिया सैफायर ग्रीन सोसाइटी के बच्चों ने इस समय को मानवता और सेवा के नाम कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। सोसाइटी के छह उत्साही बच्चों ने अपनी छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए अमासिवनी गाँव के बच्चों के लिए ‘क्रिएटिव आर्टवर्क’ वर्कशॉप की शुरुआत की है।

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हुनर से बढ़ती दूरियाँ कम करने का प्रयास

एम्पीरिया कम्युनिटी हॉल में पिछले 10 दिनों से हर दिन 2 घंटे एक विशेष क्लास लगती है। यहाँ सोसाइटी के बच्चे शिक्षक की भूमिका में होते हैं और गाँव से आए नन्हे साथी उनके छात्र। यह पहल न केवल बच्चों को कला सिखा रही है, बल्कि सामाजिक समरसता और समानता का पाठ भी पढ़ा रही है।

इन नन्हे नायकों ने संभाली कमान

इस सराहनीय कार्य में मुख्य भूमिका निभाने वाले बच्चे हैं:

  • अलंकृता (सुपुत्री सुनैना एवं  सुमित उपाध्याय)

  • पीहू अग्रवाल (सुपुत्री नेहा एवं  सुनील अग्रवाल)

  • आविका पालीवाल (सुपुत्री डॉ. अंकित एवं सुरभि पालीवाल)

  • वाणी बजाज (सुपुत्री भाविका एवं पंकज बजाज)

  • समाया जिंदल (सुपुत्री सोनम एवं  विवेक जिंदल)

  • सिया अग्रवाल (सुपुत्री विजीयता एवं राकेश अग्रवाल)

संस्कारों का प्रतिबिंब

अभिभावकों का कहना है कि वे चाहते थे कि उनके बच्चे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझें। अपनी कला और समय को गाँव के बच्चों के साथ साझा कर ये बच्चे एम्पीरिया सोसाइटी के उच्च संस्कारों और करुणा का परिचय दे रहे हैं। वर्कशॉप में शामिल गाँव के बच्चों के चेहरों पर खिलती मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान बाँटने से बढ़ता है और खुशियाँ फैलाने से समाज सुंदर बनता है।

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