छोटे शहर, बड़ी छलांग: भारत के पहले डिजिटल क्रेडिट एंड इंक्लूजन इंडेक्स में टियर-2 शहर सबसे आगे

* डिजिटल क्रेडिट अपनाने में टियर-2 शहर सबसे आगे, औसत स्कोर 58.64, जो टियर-1 और टियर-3 दोनों से ऊपर है
* जानकारी 94.4% लोगों को है, भरोसा नहीं। डिजिटल उधारी पर भरोसा, डिजिटल भुगतान से 17 अंक कम है।
* नौकरीपेशा महिलाएं नौकरीपेशा पुरुषों से आगे – स्कोर 62.0 बनाम 60.2।
मुंबई : पहले इंडिया फाउंडेशन ने अमेज़न पे के साथ मिलकर आज डिजिटल क्रेडिट एंड इंक्लूजन इंडेक्स (डीसीआईआई) 2026 जारी किया। यह भारत का पहला ऐसा संयुक्त मानक है, जो देश के डिजिटल क्रेडिट के सफर की पूरी तस्वीर दिखाता है। यह अध्ययन 20 राज्यों के 100 शहरों में 5,000 से ज्यादा लोगों से सीधे बातचीत पर आधारित है। अब तक के मानक ज्यादातर यही देखते आए हैं कि डिजिटल भुगतान कितना अपनाया गया या कुल कर्ज कितना बंटा। डीसीआईआई इससे आगे जाकर देखता है कि डिजिटल क्रेडिट तक पहुंच किसकी है, लोग उसे कितनी आसानी से और कितनी बार इस्तेमाल करते हैं, उधार क्यों लेते हैं, उस पर भरोसा करते हैं या नहीं, और उसके इस्तेमाल से उनकी वित्तीय स्थिति सचमुच बेहतर होती है या नहीं। भारत के वित्तीय समावेशन की तस्वीर में यह एक बड़ी कमी को भरता है।
पहले इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा, “वित्तीय समावेशन को सिर्फ पहुंच और इस्तेमाल से नहीं, नतीजों से नापा जाना चाहिए। डीसीआईआई यही देखता है कि अलग-अलग शहरों, लिंग और आय वर्गों में डिजिटल क्रेडिट से वित्तीय मजबूती बढ़ रही है या नहीं। यह इंडेक्स अमेज़न पे के साथ मिलकर बनाया गया है और हर साल इसे ट्रैक किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि इससे नीति बनाने वालों और वित्तीय संस्थानों को कमियां पहचानने में मदद मिलेगी, और वे अपनी कोशिशें वहां लगा सकेंगे जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।”
अमेज़न पे इंडिया के सीईओ विकास बंसल ने कहा, “भारत के बेहतरीन डिजिटल भुगतान ढांचे ने करोड़ों लोगों के लेनदेन का तरीका बदल दिया है। अगला कदम यह है कि डिजिटल क्रेडिट भी उतना ही सुलभ, भरोसेमंद और काम का बने। टियर-2 शहरों का डिजिटल क्रेडिट में आगे निकलना बताता है कि अगली बड़ी बढ़त कहां से आ सकती है। हमारे 75% ग्राहक टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं, इसलिए डीसीआईआई से मिली समझ हमें इन बाजारों के लिए ज्यादा काम के क्रेडिट और बचत के अनुभव बनाने में मदद करेगी। साथ ही टियर-1 शहरों में जो अवसर अब तक अछूते हैं, उन पर भी काम होगा। भारत विकसित भारत 2047 की तरफ बढ़ रहा है, और डीसीआईआई यह देखने में मदद करेगा कि डिजिटल क्रेडिट असल वित्तीय तरक्की में कैसे बदलता है।”



