छत्तीसगढ़ की राज्य योजनाओं में लागू होगा S-SNA मॉडल, CM साय बोले- राशि का होगा पारदर्शी और सुरक्षित उपयोग

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं में धन के प्रवाह को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।
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एक योजना के लिए एक केंद्रीकृत बैंक खाता
S-SNA मॉडल के तहत अलग-अलग क्रियान्वयन एजेंसियों के कई बैंक खातों में सरकारी राशि रखने के बजाय प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक केंद्रीकृत S-SNA Mother Account बनाया जाएगा। जरूरत के अनुसार ही राशि जारी की जाएगी।
भुगतान के समय S-SNA खाते से संबंधित Zero Balance Subsidiary Account (ZBSA) के माध्यम से सीधे हितग्राही या वेंडर के खाते में राशि भेजी जाएगी। इससे सरकारी धन लंबे समय तक अलग-अलग खातों में निष्क्रिय नहीं रहेगा और उपलब्ध राशि का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
Just-in-Time Fund Release से होगा भुगतान
नई व्यवस्था में Just-in-Time Fund Release व्यवस्था लागू होगी। यानी योजना की पूरी राशि पहले से विभिन्न खातों में जमा रखने के बजाय वास्तविक जरूरत के समय ही भुगतान किया जाएगा। इससे बैंक खातों में अनावश्यक रूप से पड़ी राशि कम होगी और योजनाओं में फंड का फ्लोट लगभग शून्य रखने का प्रयास किया जाएगा।
इस व्यवस्था में DBT और Non-DBT दोनों तरह के भुगतान शामिल किए जा सकेंगे। जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिन्हित Implementing Agencies को भी इसके दायरे में लाया जा सकेगा।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
S-SNA मॉडल के जरिए योजनाओं में फंड फ्लो और खर्च की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। विभागों को उपलब्ध निधि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक खर्च और अप्रयुक्त राशि की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिल सकेगी।
डिजिटल सिस्टम में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल होने से वित्तीय लेन-देन की निगरानी भी मजबूत होगी। इससे अनधिकृत भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाओं पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
निष्क्रिय राशि और ब्याज भार को कम करने का प्रयास
वित्त मंत्री ओपी चौधरी के अनुसार, कई बार जरूरत से पहले राशि आहरित होने के कारण विभागीय खातों में सरकारी धन निष्क्रिय पड़ा रहता है। S-SNA व्यवस्था के जरिए इस समस्या को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार के अनुसार विभागीय निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ रुपये और RBI के DEAF खातों में करीब 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी समस्याओं को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।
नई व्यवस्था से उपलब्ध निधियों के बेहतर प्रबंधन के कारण अनावश्यक ऋण की जरूरत और उस पर लगने वाले ब्याज भार को कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
अर्जित ब्याज राज्य की संचित निधि में होगा जमा
S-SNA व्यवस्था में योजनाओं की राशि के प्रबंधन से अर्जित ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा। इससे सार्वजनिक धन के प्रबंधन और राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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चरणबद्ध तरीके से लागू होगा S-SNA मॉडल
S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन के लिए छह प्रमुख चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें योजना की पहचान, वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code आवंटन, e-Kosh Mapping, S-SNA और ZBSA खाते खोलना तथा Treasury से S-SNA और Implementing Agency के जरिए हितग्राही या वेंडर को भुगतान शामिल है।
यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं और विभागों की अन्य चिन्हित योजनाओं पर लागू होगी। वहीं PFMS-SNA/SPARSH के अंतर्गत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं और ऐसी योजनाएं जिनमें DDO सीधे e-Kosh के माध्यम से भुगतान करते हैं, इसके दायरे से बाहर रहेंगी।
मंत्रिपरिषद ने S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन से जुड़ी आवश्यक कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया है। सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से राज्य में निधि प्रवाह, वित्तीय अनुशासन और योजनाओं की निगरानी को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।





