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भारत-पाक के बीच तनाव कम होते ही शेयर बाजार को मिली राहत, इस हफ्ते इन चीज़ों पर रहेगी नज़र

 भारत-पाकिस्तान तनाव: बाजार को मिली राहत- बीते दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच चले सैन्य तनाव के बाद अब माहौल शांत हुआ है। दोनों देशों ने जमीन, समुद्र और हवा में सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। इससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।

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निवेशकों का बढ़ा भरोसा- विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। तनाव कम होने पर आमतौर पर बाजार में तेजी आती है। लंबे समय के निवेश के लिए ये एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, विदेशी निवेशकों के रुख पर भी नज़र रखना ज़रूरी है क्योंकि पिछले हफ़्ते उन्होंने बिकवाली की थी।

आर्थिक आंकड़े तय करेंगे बाजार की दिशा- इस हफ़्ते बाजार की चाल घरेलू और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। भारत-पाकिस्तान के बीच हालात, महंगाई दर (CPI और WPI), और विदेश व्यापार के आंकड़े बाजार को प्रभावित करेंगे। ये आंकड़े निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, खासकर जो लंबे समय के निवेश की योजना बना रहे हैं। कई बड़े आर्थिक कारक इस हफ़्ते बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं, इसलिए हर छोटे-बड़े संकेत पर नज़र रखना ज़रूरी है।

कंपनियों के नतीजे और शेयरों की चाल- इस हफ़्ते कई बड़ी कंपनियां अपनी तिमाही नतीजे जारी करेंगी (टाटा स्टील, भारती एयरटेल, आदि)। इन नतीजों से पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितनी मज़बूती है। अच्छे नतीजे शेयरों में तेज़ी ला सकते हैं, वहीं कमज़ोर नतीजे बिकवाली का कारण बन सकते हैं। इस समय बाजार में कंपनी-विशेष पर ध्यान केंद्रित है, यानी जिस कंपनी के नतीजे अच्छे होंगे, उसका शेयर अच्छा प्रदर्शन करेगा।

विदेशी निवेशकों का भरोसा कायम- हालांकि पिछले हफ़्ते विदेशी निवेशकों ने मुनाफ़ावसूली की, लेकिन इस महीने उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया है। मज़बूत घरेलू अर्थव्यवस्था और सुधरे हुए अंतरराष्ट्रीय संकेतों से उनका भरोसा कायम है। रिकॉर्ड GST संग्रह और मज़बूत कंपनियों के नतीजे भी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। अप्रैल के आंकड़े बताते हैं कि देश की आर्थिक नींव मज़बूत है।

गिरावट के बावजूद घबराने की ज़रूरत नहीं- पिछले हफ़्ते शेयर बाजार में गिरावट आई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिंता की बात नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मज़बूत है और इस तरह की अस्थायी गिरावट का लंबे समय तक असर नहीं रहता। अगर आने वाले दिनों में महंगाई और कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे, तो बाजार फिर से रफ़्तार पकड़ सकता है। इसलिए समझदारी से निवेश करना ज़रूरी है।

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