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हाइड्रोजन गाड़ियों के लिए नंबर प्लेट कैसी होगी? सरकार ने जारी किया HSRP प्लेट की रंग योजना का ड्राफ्ट

परिवहन मंत्रालय ने हाइड्रोजन फ्यूल (Hydrogen Fuel) से चलने वाले वाहनों के लिए पंजीकरण नंबर प्लेट की एक नई श्रेणी का प्रस्ताव दिया है. MoRTH ने 30 दिनों में सुझाव और आपत्तियां मांगे हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) द्वारा जारी एक मसौदा अधिसूचना के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाले कमर्शियल व्हीकल के मामले में, नंबर प्लेट का ऊपरी आधा हिस्सा हरा और निचला आधा हिस्सा नीला होगा, जबकि अंक पीले रंग में होंगे.

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हाइड्रोजन गाड़ियों के लिए नंबर प्लेट कैसी होगी?
कमर्शियल व्हीकल के मामले में, नंबर प्लेट का ऊपरी आधा हिस्सा हरा और निचला आधा हिस्सा नीला होगा, जबकि अंक पीले रंग में होंगे.
प्राइवेट व्हीकल के मामले में, नंबर प्लेट का ऊपरी आधा भाग हरा और निचला आधा भाग नीला होगा, जबकि अंक सफेद रंग के होंगे.
किराये पर टैक्सी के मामले में, नंबर प्लेट का ऊपरी आधा भाग काला और निचला आधा भाग नीला होगा, जबकि प्लेट पर अंक पीले रंग के होंगे.

क्‍या है हाइड्रोजन?
हाइड्रोजन क्लीन एनर्जी के अंतर्गत आता है. ये एक ऐसा तत्त्व है जो वायुमंडल में किसी न किसी से जुड़ा हुआ प्राप्त होता है. ये शुद्ध रूप से वायुमंडल में उपलब्ध नहीं हो पाता है. इसमें बहुत ऊर्जा पाई जाती है. धरती पर ये जटिल अणुओं जैसे पानी या हाइड्रोकार्बन के तौर पर पाया जाता है. ये ऊर्जा का स्रोत नहीं बल्कि वाहक है यानी इस्तेमाल के लिए इसका उत्पादन किया जा सकता है, इसे अलग किया जा सकता है या संग्रहित किया जा सकता है. इसके जलने पर पानी ही बनता है. हाइड्रोजन को प्राप्त करने के लिए जल में इलेक्ट्रोलिसिस की क्रिया अपनाई जाती है.

कैसे तैयार किया जाता है ग्रीन हाइड्रोजन?
वैसे तो हाइड्रोजन (Hydrogen) को अलग करने के कई तरीके होते हैं, इन तरीकों की वजह से ही इसका रंग ग्रे, ब्‍लैक, ब्‍लू आदि अलग-अलग हो जाता है. लेकिन यहां हम बात करेंगे ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) की. ये वो चीज है जिसके लिए सरकार काम कर रही है. जिससे ट्रेन और कारों को चलाने की बात की जा रही है. ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है. इस प्रोसेस में इलेक्ट्रोलाइजर का इस्तेमाल होता है. इलेक्ट्रोलाइजर, रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करता है. इसमें सोलर और विंड दोनों तरह की एनर्जी शामिल है.

हाइड्रोजन फ्यूल एक ऐसा ईंधन है जिसकी एनर्जी बाकी ईंधनों के अपेक्षा ज्यादा होती है, साथ ही ये सस्ता और हल्का भी होता है. एक्‍सपर्ट्स की मानें तो 1 किलो हाइड्रोजन करीब 4.5 लीटर डीजल के बराबर है. ऐसे में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इसे एक बेहतरीन विकल्‍प माना जा रहा है. हाइड्रोजन फ्यूल का एक फायदा ये भी है कि इससे प्रदूषण को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. इसमें धुंए की जगह H2O निकलता है. इस वजह से पॉल्यूशन भी नहीं फैलता है.

बता दें कि सरकार ने National Hydrogen Mission लॉन्च किया था. ये मिशन कई तरह के इंसेंटिव दे रही है. राज्यों ने भी अपने स्तर पर Hydrogen पॉलिसी जारी करना शुरू कर दिया है. ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर तैयारियों को बल मिलेगा और गाड़ियों में Hydrogen Gas इस्तेमाल के लिए मोडिफिकेशन को जल्द लागू किया जा सकेगा.

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देते हुए सरकार ने बसों और ट्रकों में हाइड्रोजन के इस्तेमाल के लिए पांच पायलट परियोजनाएं शुरू की हैं. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस मिशन के तहत ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हाइड्रोजन परियोजनाओं को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. विस्तृत जांच के बाद मंत्रालय ने कुल 37 वाहनों (बसों और ट्रकों) और 9 हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशनों वाली पांच पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

ट्रायल के लिए जिन वाहनों को चुना जाएगा, उनमें 15 हाइड्रोजन ईंधन सेल बेस्ड वाहन और 22 हाइड्रोजन अन्तर्दहन इंजन आधारित वाहन शामिल हैं. ये वाहन देश भर में 10 अलग-अलग मार्गों पर चलेंगे, जिसमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंग नगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडापल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और एनएच-16 विशाखापत्तनम-बय्यावरम शामिल हैं.

 

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