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BCCI को भी माननी होगी नई स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल की गाइडलाइन, सरकार ला रही बड़ा बदलाव

 नया खेल विधेयक: क्या होगा खेल जगत में क्रांति?-भारत में खेलों के भविष्य को बदलने वाला एक नया खेल विधेयक संसद में आने वाला है! इससे बीसीसीआई जैसे बड़े संगठनों से लेकर छोटे क्लब तक सभी प्रभावित होंगे। आइये जानते हैं विस्तार से:

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 बीसीसीआई की स्वायत्तता: बदलाव के साथ निरंतरता-बीसीसीआई अपनी आजादी बनाए रखेगा, लेकिन अब उसे भी नए नियमों का पालन करना होगा। विवादों के निपटारे के लिए एक राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा जो खिलाड़ियों के चुनाव, चयन और प्रशासन से जुड़े विवादों को जल्दी और निष्पक्ष तरीके से सुलझाएगा। इससे खेलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और न्याय सुनिश्चित होगा।

 राष्ट्रीय खेल बोर्ड: नियमों की नई नज़र-एक राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) का गठन होगा जो खेल संघों को मान्यता देगा और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखेगा। यह बोर्ड वित्तीय अनियमितताओं या चुनावी धांधली की जांच करेगा और ज़रूरत पड़ने पर संघों की मान्यता रद्द भी कर सकता है। इससे खेल संघों में जवाबदेही बढ़ेगी।

 उम्र सीमा में छूट: अनुभव का सम्मान-खेल संगठनों के प्रशासकों की उम्र सीमा में थोड़ी ढील दी गई है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मंज़ूरी से 70 से 75 साल के लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे। इससे अनुभवी लोगों को खेल प्रशासन में योगदान देने का मौका मिलेगा।

चयन समिति और खिलाड़ियों की भागीदारी: सभी की आवाज़-बोर्ड के सदस्यों के चयन के लिए एक चयन समिति होगी जिसमें कैबिनेट सचिव, SAI के महानिदेशक, दो अनुभवी खेल प्रशासक और एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी शामिल होंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बोर्ड में ईमानदार, अनुभवी और खेल भावना से जुड़े लोग हों।

 खिलाड़ियों के हितों की रक्षा: खिलाड़ी सबसे पहले-सरकार का दावा है कि यह विधेयक पूरी तरह से खिलाड़ियों के हित में है। इससे चुनाव पारदर्शी होंगे, लेखा-जोखा सही होगा और खिलाड़ियों की शिकायतों का समय पर निपटारा होगा। इससे खिलाड़ियों को सुरक्षित और न्यायसंगत माहौल मिलेगा।

 राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल: त्वरित और प्रभावी न्याय-खेल से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए एक राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा। इस ट्रिब्यूनल के फैसले को केवल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। इससे विवादों का त्वरित और प्रभावी निपटारा होगा।

 IOC की हरी झंडी: ओलंपिक सपने को बल-IOA की आपत्तियों के बावजूद, IOC ने इस विधेयक को ओलंपिक चार्टर के अनुरूप बताया है। इससे भारत की 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

 IOA की भूमिका में बदलाव: नई ज़िम्मेदारी-इस विधेयक के बाद, अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं से तालमेल बिठाने की ज़िम्मेदारी NSB के पास होगी, जिससे IOA की भूमिका कम हो जाएगी।

एक नया अध्याय-यह विधेयक भारतीय खेल प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करेगा और खेलों में सुधार लाएगा। अब देखना होगा कि संसद इस विधेयक को कितनी जल्दी मंजूरी देती है।

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