
बाजार में गिरावट: निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?- शुक्रवार को शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी। सेंसेक्स 407 अंक गिरकर 81,776 पर और निफ्टी 144 अंक लुढ़ककर 24,917 पर आ गया। ये गिरावट इतनी अचानक आई कि निवेशक हैरान रह गए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एशियाई बाजारों का असर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली- इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह एशियाई बाजारों में आई कमजोरी और विदेशी निवेशकों का लगातार शेयर बेचना है। विदेशी निवेशकों ने पिछले चार दिनों में 11,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेच दिए हैं। इससे बाजार में भरोसा कम हुआ है और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। बड़ी कंपनियों जैसे बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व के शेयरों में भी जून तिमाही के नतीजों के बाद क्रमशः 6% और 4% की भारी गिरावट देखी गई। टाटा स्टील, हिंदुस्तान यूनिलीवर, और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि, कुछ शेयरों जैसे ICICI बैंक, HCL टेक और SBI में मामूली बढ़त देखने को मिली।
वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका- यह गिरावट वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आशंकाओं और बढ़ती महंगाई की चिंताओं को भी दर्शाती है। दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता का माहौल है, जिसका असर हमारे शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। निवेशक अब सावधानी बरत रहे हैं और जोखिम उठाने से हिचकिचा रहे हैं।
भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: किन क्षेत्रों को होगा फायदा?- बाजार में गिरावट के बीच एक अच्छी खबर भी आई है। भारत और ब्रिटेन के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा और आर्थिक विकास में मदद करेगा।
व्यापार में बढ़ोतरी और नई संभावनाएं- इस समझौते से भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में कोई शुल्क नहीं लगेगा। ब्रिटिश उत्पादों जैसे कार और व्हिस्की पर भारत में टैरिफ कम हो जाएगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच मौजूदा 56 अरब डॉलर के व्यापार को 2030 तक दोगुना करने में मदद करेगा। इससे टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा और आभूषण जैसे कई क्षेत्रों को बहुत फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की छवि को एक व्यापार-अनुकूल देश के रूप में मजबूत करेगा, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में व्यापार युद्ध की स्थिति बनी हुई है। यह समझौता न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा बल्कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।

