
दिव्या देशमुख की ऐतिहासिक जीत पर सुसान पोलगर का बयान – ‘हिम्मत और जज्बे से जीता वर्ल्ड कप’
19 साल की दिव्या देशमुख: शतरंज की नई रानी!-यह खबर सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया होगा! 19 साल की दिव्या देशमुख ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। जॉर्जिया के बातुमी में हुए वर्ल्ड कप के रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्होंने दिग्गज कोनेरू हम्पी को टाईब्रेकर में मात देकर खिताब जीत लिया। यह जीत सिर्फ़ दिव्या के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल है। इस जीत के साथ ही दिव्या ने 2026 के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर लिया है और वो भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर भी बन गई हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दिव्या की कामयाबी: जुनून और जज़्बे की दास्तान-दिव्या की इस शानदार जीत पर महान हंगेरियन-अमेरिकन ग्रैंडमास्टर सुसान पोलगर ने खूब तारीफ़ की है। उन्होंने दिव्या की सफलता का श्रेय उनके अदम्य साहस और मानसिक दृढ़ता को दिया। पोलगर ने कहा कि भले ही टूर्नामेंट से पहले दिव्या सबसे बड़ी दावेदार नहीं मानी जा रही थीं, लेकिन उनमें जीतने की चाहत और मुश्किलों से लड़ने का हौसला देखते ही बनता था। कई मुश्किल घड़ियों का सामना करते हुए भी दिव्या ने कभी हार नहीं मानी और आखिर तक अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यह दिखाता है कि लगन और दृढ़ निश्चय से असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
भारतीय महिला शतरंज में नया युग-इस जीत के साथ ही दिव्या देशमुख उन चुनिंदा भारतीय महिला ग्रैंडमास्टर्स की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिसमें पहले सिर्फ़ हम्पी, हरिका द्रोणावल्ली और आर. वैषाली का नाम था। वह दुनिया की 44वीं महिला ग्रैंडमास्टर भी बन गई हैं। सुसान पोलगर ने इस जीत को भारतीय शतरंज के लिए ‘गोल्डन एज’ का आगाज़ बताया है। उन्होंने कहा कि आज भारत में कई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसा वातावरण है जहाँ प्रतिभा को पनपने का मौका मिल रहा है।
कोचिंग और मार्गदर्शन: सफलता का आधार-पोलगर ने इस सफलता में कोचिंग और मार्गदर्शन की अहम भूमिका पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास आज न केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, बल्कि अनुभवी कोच और मेंटर्स भी हैं। विश्वनाथन आनंद जैसे दिग्गजों के मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को सही दिशा मिल रही है। सरकार और प्रायोजकों का सहयोग भी भारतीय शतरंज के इस उज्जवल भविष्य को और मज़बूत कर रहा है। यह एक संयुक्त प्रयास है जिसने दिव्या जैसी प्रतिभा को निखारने में मदद की है।
दिव्या के लिए आगे का रास्ता-पोलगर ने दिव्या को सलाह दी कि वह अपनी मेहनत और अभ्यास में कोई कमी न करें क्योंकि अब सबकी नज़रें उन पर होंगी। उन्होंने कहा कि दिव्या अब एक उभरती हुई खिलाड़ी नहीं, बल्कि वर्ल्ड कप चैंपियन हैं। आगे का रास्ता और भी कठिन होगा, इसलिए उन्हें और भी ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत है। ज़्यादा अभ्यास करें और अपनी कमज़ोरियों पर काम करें, यही सफलता का मंत्र है।

