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धराली में बादल फटने से तबाही: 12 दबे, 60 लोग लापता, सीएम धामी ने दिए युद्धस्तर पर राहत कार्य के निर्देश

धराली में बादल फटने से भारी तबाही: दर्दनाक हादसे की कहानी-उत्तराखंड के धराली गांव में सोमवार रात को हुई भीषण त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। अचानक हुए बादल फटने से आई बाढ़ और मलबे ने गांव के कई घरों को तबाह कर दिया, जिससे कई लोगों की जान चली गई और कई लापता हो गए। इस घटना से जुड़ी कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:

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 प्रकृति का कहर: धराली गांव में तबाही का मंजर-सोमवार रात को अचानक बादल फटने से धराली गांव में भारी तबाही मच गई। तेज बारिश के साथ आए पानी और मलबे का सैलाब गांव में घुस गया, जिससे दर्जनों घर बह गए और कई लोग मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया। रात के अंधेरे में हुई इस घटना ने बचाव कार्य को और भी मुश्किल बना दिया। घरों के अलावा, गांव की कई ज़रूरी सुविधाएँ भी इस आपदा में तबाह हो गई हैं, जिससे लोगों को और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह घटना एक बार फिर से पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे की ओर इशारा करती है।

राहत और बचाव कार्य: युद्ध स्तर पर जारी अभियान-घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को हरसंभव मदद का निर्देश दिया है। रात भर चलने वाले बचाव कार्य में कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है, लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। इस आपदा में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और उन्हें भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री मुहैया कराई जा रही है। हालांकि, बचाव कार्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि मुश्किल भूभाग और खराब मौसम।

 आगे का रास्ता: पुनर्निर्माण और सुरक्षा के उपाय-धराली गांव में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की चुनौतियों को उजागर किया है। सरकार को ऐसे इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करने की ज़रूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और आर्थिक मदद भी प्रदान करनी होगी ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें। इस घटना से सबक लेते हुए, हमें प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बचाव के उपायों को मज़बूत करने की आवश्यकता है।

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