
जतिन नचरानी
रायपुर। निरंकारी राजपिता जी ने कृषि उपज मंडी के प्रांगण में आयोजित विशाल संत समागम में मानव समाज को प्रेमा भक्ति का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमा भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि भक्तों के जीवन से प्रकट होती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!निरंकारी माता सविन्दर जी के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने फरमाया कि भक्ति का सिद्धांत है, तू कुबूल तो तेरा किया सब कुबूल। ईश्वरीय प्रेम कोई क्रिया मात्र नहीं, बल्कि स्वयं को प्रेम के रूप में ढालना है। जहां प्रेम है, वहां केवल प्रीतम की ही बात होती है। यह प्रेम अक्ल से परे है, जिसे बुद्धि समझ नहीं सकती। राजपिता जी ने मीरा, शबरी और कबीर जैसे भक्तों का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरसिख का गुरु से केवल प्रेम का रिश्ता होता है। उन्होंने मजनू और लैला की कहानी का जिक्र किया, जहां मजनू केवल लैला को ही देखता था। ठीक उसी तरह, सच्चा भक्त अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण रखता है। भक्त का हृदय परहित और नि:स्वार्थ सेवा से भरा होता है। यदि भक्त की अवस्था में पीड़ा के प्रति समता नहीं, तो प्रेमा भक्ति संभव नहीं। उन्होंने चिंता जताई कि आज लोग ईश्वर का नाम सांसारिक सुखों के लिए लेते हैं, न कि प्रभु की प्राप्ति के लिए, जिससे जीवन का मुख्य उद्देश्य अधूरा रह जाता है। इस समागम में दुबई, बैंगलुरु जैसे दूरस्थ स्थानों से भक्तों ने हिस्सा लिया। क्षेत्रीय जोनल इंचार्ज गुरबक्श सिंह कालरा ने सभी भक्तों, पुलिस, यातायात पुलिस, नगर निगम, बिजली, जल विभाग और मंडी अधिकारियों का सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

