
पुजारा का ‘वॉल’ जैसा करियर: एक युग का अंत!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अलविदा, पुजारा! टीम इंडिया के ‘द वॉल’ ने कहा क्रिकेट को अलविदा-भारतीय टेस्ट क्रिकेट के वो दीवार, जिस पर टीम इंडिया ने न जाने कितने तूफानों का सामना किया, चेतेश्वर पुजारा, अब मैदान पर खेलते हुए नज़र नहीं आएंगे। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के ज़रिए क्रिकेट को अलविदा कहने का ऐलान किया। पुजारा, जिन्हें उनकी अविश्वसनीय धैर्य और मजबूत बल्लेबाजी के लिए जाना जाता था, 13 साल से भी ज़्यादा समय तक टीम इंडिया की टेस्ट टीम की जान रहे। उनके इस फैसले ने क्रिकेट प्रेमियों के दिलों को छू लिया है।
पुजारा का दिल छू लेने वाला विदाई संदेश-पुजारा ने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए एक ऐसा संदेश लिखा, जिसे पढ़कर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। उन्होंने कहा, “भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान सुनना और हर बार मैदान पर अपना 100% देना, इन सब को शब्दों में बयां करना वाकई मुश्किल है। लेकिन जैसा कि कहा जाता है, हर अच्छी चीज़ का एक अंत होता है। भारी मन और ढेर सारे आभार के साथ, मैंने भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए तहे दिल से शुक्रिया।” उन्होंने अपने क्रिकेटिंग सफर को याद करते हुए बताया कि कैसे राजकोट जैसे छोटे शहर से निकलकर उन्होंने भारतीय टीम तक का सफर तय किया। उन्होंने अपने परिवार, कोच, बीसीसीआई और सभी प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। यह संन्यास ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ समय से उन्हें लगातार टीम में जगह नहीं मिल पा रही थी, जो उनके जैसे दिग्गज खिलाड़ी के लिए काफी मुश्किल रहा होगा।
13 साल का शानदार सफर और अनमोल रिकॉर्ड-चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट करियर वाकई यादगार रहा। उन्होंने भारत के लिए कुल 103 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 7,195 रन बनाए। इन रनों में 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 43.60 का रहा, जो टेस्ट क्रिकेट में काफी मायने रखता है। साल 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 206 रनों की पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों को याद है। टेस्ट के अलावा, उन्होंने 5 वनडे मैच भी खेले, लेकिन सीमित ओवरों के प्रारूप में वे कभी अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। घरेलू क्रिकेट में, उन्होंने सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। 2016-17 के रणजी सीजन में उन्होंने 1,605 रन बनाए, जो किसी भी भारतीय घरेलू सीजन में सबसे ज़्यादा स्कोर है। इसके अलावा, उन्होंने अपने करियर में 12 दोहरे शतक जड़े, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा लगाए गए सबसे ज़्यादा दोहरे शतक हैं।
ऑस्ट्रेलिया सीरीज और अविस्मरणीय योगदान-पुजारा का करियर कई सुनहरे पलों से भरा है, लेकिन 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। उस सीरीज में उन्होंने कुल 521 रन बनाए थे, जिनका औसत 74.42 का था। इस सीरीज की सबसे खास बात यह थी कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं के घर में हराकर इतिहास रच दिया था। पुजारा को उस ऐतिहासिक सीरीज में ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ भी चुना गया था। इसके अलावा, 2013 में उन्हें आईसीसी एमर्जिंग क्रिकेटर ऑफ द ईयर के खिताब से भी नवाजा गया था। आईपीएल में भी उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेला और 2021 में टीम ने खिताब जीता, हालांकि उस सीजन में उन्हें खेलने का ज़्यादा मौका नहीं मिला था।
पुजारा की विदाई और भारतीय क्रिकेट का नया अध्याय-पिछले कुछ सालों से भारतीय क्रिकेट टीम का फोकस युवा खिलाड़ियों पर रहा है, जिसके चलते पुजारा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को टीम से बाहर बैठना पड़ा। उनका आखिरी टेस्ट मैच जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था। पुजारा के संन्यास के साथ ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट में एक युग का अंत हो गया है। उन्होंने अपने धैर्य, जुझारूपन और क्लासिक बल्लेबाजी से करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जगह बनाई। आज भी उन्हें ‘वॉल 2.0’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर राहुल द्रविड़ की तरह भारतीय पारी को संभाला है। क्रिकेट जगत के दिग्गजों और उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

