
कोलकाता में ‘जल प्रलय’: जब सड़कें बनीं नदियाँ और जीवन हुआ ठप!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बारिश का ऐसा कहर, जो दशकों में नहीं देखा!-कोलकाता शहर ने हाल ही में एक ऐसी बारिश देखी है, जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। पिछले चार दशकों में इतनी भयंकर बारिश पहले कभी नहीं हुई। सोचिए, सिर्फ 24 घंटे में 251.4 मिलीमीटर बारिश! यह 1988 के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इस मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को मानो घुटनों पर ला दिया। जहाँ देखो, सड़कें पानी से लबालब भरी हुई थीं, मानो नदियाँ शहर के बीच से बह निकली हों। गाड़ियाँ पानी में ऐसे डूबी थीं जैसे नाव हो, और लोग घुटनों से लेकर कमर तक पानी में फंसे हुए थे। कोलकाता के कई इलाके, जैसे गड़िया और जोधपुर पार्क, इतने जलमग्न हो गए कि घरों के अंदर तक पानी घुस गया। लोगों को जल्दी-जल्दी अपना सामान, खासकर फर्नीचर, ऊपर की मंजिलों पर ले जाना पड़ा। वहीं, दुकानदारों का तो जैसे बुरा हाल था; उनकी किताबें, कपड़े, और इलेक्ट्रॉनिक सामान सब कुछ पानी में बह गया। कई जगहों पर तो बाइक और कारें पानी पर तैरती हुई दिख रही थीं, यह नज़ारा बेहद भयावह था।
बिजली के खुले तार: मौत का जाल बिछा!-इस विनाशकारी बारिश ने सिर्फ़ शहर की रफ्तार ही नहीं रोकी, बल्कि कई अनमोल जिंदगियाँ भी छीन लीं। पुलिस के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, कम से कम आठ लोगों की मौत करंट लगने से हुई। यह बहुत ही दुखद घटना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर गहरा दुख जताते हुए बिजली कंपनी CESC पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने साफ़ कहा कि जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोया है, सरकार उन्हें मुआवज़ा और नौकरी ज़रूर देगी। मुख्यमंत्री ने यह सवाल भी उठाया कि जब बिजली कंपनियाँ शहर में अपना कारोबार चलाती हैं, तो उनकी यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वे सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करें और अपने सिस्टम को आधुनिक बनाएँ? इन हादसों ने आने वाले दुर्गा पूजा के त्योहार की खुशियों पर भी ग्रहण लगा दिया है, और लोगों के दिलों में गहरा सदमा भर दिया है।
यातायात ठप्प, लोगों की फँसी जान!-बारिश का सबसे बुरा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। मेट्रो की कई लाइनें बंद करनी पड़ीं, ट्रेनें जहाँ की तहाँ खड़ी रह गईं और सड़कों पर गाड़ियों का चलना मानो बंद हो गया। EM बाइपास, ए.जे.सी बोस रोड और पार्क सर्कस जैसे शहर के मुख्य रास्ते पूरी तरह से पानी में डूब गए थे। जो लोग ऑफिस या काम पर जा रहे थे, उन्हें घुटनों तक पानी में चलकर जाना पड़ा। कई लोग तो कमर तक पानी में फँसे हुए थे और उन्हें तीन-चार किलोमीटर तक ऐसे ही चलना पड़ा। टैक्सी और ऑटो वालों ने तो जैसे लूट मचा दी थी; जो सफ़र 150 रुपये का था, उसके लिए 600 रुपये तक माँगे जा रहे थे। कई बसें भी बीच रास्ते में खराब हो गईं। कुल मिलाकर, इस बारिश ने पूरे कोलकाता को जैसे पंगु बना दिया था।
हवाई और रेल यात्रा भी हुई अस्त-व्यस्त!-बारिश का असर सिर्फ़ सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि हवाई और रेल यात्राएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट पर 30 से ज़्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और कई उड़ानें अपने तय समय से काफ़ी देर से रवाना हुईं। इसी तरह, पूर्वी रेलवे को सीलदह सेक्शन पर ट्रेनों को रोकना पड़ा, और सर्कुलर रेलवे की सेवाएँ पानी भरने की वजह से पूरी तरह ठप हो गईं। मेट्रो भी कई जगहों पर बंद रही और सिर्फ़ कुछ हिस्सों में ही चल पाई। जो यात्री किसी तरह एयरपोर्ट या स्टेशन पहुँच भी गए, वे वहाँ घंटों पानी में फंसे रहे। इस बीच, कई लोगों को अपनी यात्राएँ रद्द करनी पड़ीं, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।
स्कूल-कॉलेज बंद, पूजा की छुट्टियाँ भी पहले!-हालात को देखते हुए, राज्य सरकार ने 24 और 25 सितंबर को सभी सरकारी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का आदेश दिया। शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने बताया कि दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ भी इस बार पहले ही शुरू कर दी गई हैं। कलकत्ता यूनिवर्सिटी और जादवपुर यूनिवर्सिटी ने भी अपनी कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। कई निजी स्कूलों ने या तो छुट्टी कर दी या फिर ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुना। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे अगले दो दिनों तक घर से बाहर न निकलें। लगातार हो रही बारिश ने दुर्गा पूजा पंडाल बनाने वाले कलाकारों की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।
पंडाल आयोजकों की मेहनत पर पानी, त्योहार पर छाया संकट!-दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुटे पंडाल आयोजक इस बार सबसे ज़्यादा परेशान हैं। कई पंडालों में पानी भर गया है और आयोजक पंप लगाकर पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि तीन महीने की कड़ी मेहनत से तैयार किए गए बांस और कपड़े के बने पंडाल अब गिरने के कगार पर हैं। कुछ पंडालों में तो पानी के साथ-साथ बिजली के तार भी डूबे हुए हैं, जिससे हादसे का डर बना हुआ है। हर साल लाखों लोग इन पंडालों की खूबसूरती देखने आते हैं, लेकिन इस बार हालात बहुत अनिश्चित लग रहे हैं। इस बारिश ने त्योहार की सारी रौनक फीकी कर दी है और आयोजकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी: अभी और बढ़ सकती है मुसीबत!-भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अभी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद कम है। कोलकाता के दक्षिण और पूर्वी इलाकों में सबसे ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है, जैसे गड़िया कामदहारी में 332 मिमी, जोधपुर पार्क में 285 मिमी और कलिघाट में 280 मिमी। विभाग ने पश्चिम और पूर्वी मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, झारग्राम और बांकुड़ा जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। साथ ही, 25 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया ‘लो-प्रेशर’ क्षेत्र बनने की भी आशंका है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में शहर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
1978 और अम्फान की यादें ताज़ा, शहर सहमा!-इस बार की बारिश ने कोलकाता के लोगों को पुराने बुरे दिनों की याद दिला दी है। 1978 की वो भयानक बाढ़, जब 370 मिमी बारिश ने शहर को पूरे एक हफ़्ते तक पानी में डुबो दिया था, वो मंज़र लोगों को फिर से याद आ गया। इसी तरह, 2006 और 2020 में आए अम्फान तूफ़ान के समय भी भारी बारिश ने शहर को पूरी तरह से पंगु बना दिया था। लोग अब यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या शहर की व्यवस्था कभी ऐसे मुश्किल हालात का सामना करने के लिए तैयार हो पाएगी। यह बारिश शहर के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

