
उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
उपराष्ट्रपति चुनाव: क्या है पूरा खेल?-भारत में उपराष्ट्रपति के चुनाव की सरगर्मियाँ जोरों पर हैं। 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव से पहले की राजनीति कितनी दिलचस्प है, आइए जानते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मोदी-मुर्मू की मुलाकात: क्या है खास?-पिछले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। सरकार ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उपराष्ट्रपति चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर, चुनाव से पहले इस तरह की मुलाकात का क्या मतलब हो सकता है? क्या यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात थी, या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? इस मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक विश्लेषक भी इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। चुनाव से पहले की इस मुलाकात से साफ है कि सत्ताधारी दल अपनी रणनीति को लेकर बेहद गंभीर है। उपराष्ट्रपति का पद संविधान में एक अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इस चुनाव का महत्व और भी बढ़ जाता है।
धनखड़ का इस्तीफा: एक नया मोड़-उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा देना वाकई हैरान करने वाला था। यह भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ घटना है। इससे पहले केवल दो उपराष्ट्रपतियों ने ही बीच में ही इस्तीफा दिया था, और वो भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए। लेकिन धनखड़ ने ऐसा क्यों किया? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण है? यह सवाल हर किसी के मन में है। उनके इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है और NDA के नए उम्मीदवार को लेकर कयासबाज़ी तेज हो गई है। क्या भाजपा किसी अनुभवी नेता पर दांव खेलेगी या फिर किसी नए चेहरे को मौका देगी? यह देखना बेहद रोमांचक होगा।
संख्या बल और चुनावी गणित-चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। 21 अगस्त तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं और 9 सितंबर को वोटिंग होगी। लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद इस चुनाव में वोट देंगे। जीत के लिए 391 वोटों की ज़रूरत होगी। NDA के पास अभी 422 सांसदों का समर्थन है, जो उसे स्पष्ट बढ़त दिलाता है। लेकिन क्या NDA आसानी से जीत हासिल कर लेगा? क्या विपक्ष एक मज़बूत उम्मीदवार खड़ा कर पाएगा? और क्या इस चुनाव में किसी तरह की आम सहमति बन पाएगी? यह सब देखने वाली बातें हैं। यह चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि भारत की राजनीति की दिशा तय करने वाला एक अहम पड़ाव है।

