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सोनम वांगचुक मामला: लद्दाख हिंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका, रिहाई की मांग

 सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी: लद्दाख में लोकतंत्र पर सवाल?- एक जाने-माने शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता, सोनम वांगचुक, को लद्दाख में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया है। उनकी गिरफ़्तारी के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। यह मामला लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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 वांगचुक की गिरफ़्तारी: क्या है पूरा मामला?- लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद, शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया। उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने इस गिरफ़्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। गीतांजलि ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से तुरंत रिहाई की मांग की है। वांगचुक को राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है, और उनकी गिरफ़्तारी 26 सितंबर को हुई थी। यह मामला लद्दाख में चल रहे राजनीतिक हालात और नागरिक अधिकारों के हनन के आरोपों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है।

 गीतांजलि की याचिका और कानूनी लड़ाई- सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी गिरफ़्तारी को “अनुचित” और “लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन” बताया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की है, जिसमें सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई की मांग की गई है। याचिका में वांगचुक पर लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर के बाद हो सकती है। गीतांजलि का कहना है कि प्रशासन का रवैया अमानवीय है और यह गिरफ़्तारी नागरिक अधिकारों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यह कानूनी लड़ाई लद्दाख के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

 लद्दाख में विरोध प्रदर्शन और उसके बाद की स्थिति- 24 सितंबर को लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में कथित तौर पर चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। प्रशासन का आरोप है कि सोनम वांगचुक की टिप्पणियों ने हिंसा को भड़काया। वहीं, गीतांजलि का कहना है कि उनके परिवार और स्टाफ को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें इस बात की गहरी चिंता है कि जेल में सोनम के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है। हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया था, जिसे अब ढीला कर दिया गया है। बाज़ार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुल रहे हैं और स्कूल भी निर्धारित समय पर खुल रहे हैं। हालाँकि, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा अभी भी कड़ी है। इस बार दशहरे का त्योहार भी आयोजित नहीं किया गया, और इंटरनेट सेवाएँ निलंबित हैं। लद्दाख बार एसोसिएशन ने 6 अक्टूबर तक काम बंद रखने का निर्णय लिया है।

यह मामला लद्दाख के लोगों के लिए न्याय और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन गया है।

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