
भारी बारिश से दरकती दार्जिलिंग की पहाड़ियां: अब तक 20 की मौत, कई लापता, राहत कार्य जारी
दार्जिलिंग में भारी बारिश का कहर: 20 लोगों की मौत, कई लापता, और बचाव कार्य जारी-दार्जिलिंग, जिसे अक्सर “पहाड़ों की रानी” कहा जाता है, इस बार भारी बारिश के कारण तबाही का शिकार हुआ है। शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने भूस्खलन और बाढ़ ला दी, जिससे कम से कम **20** लोगों की जान चली गई और कई लोग लापता हैं। बचाव दल लगातार फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बारिश और खराब मौसम के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!तबाही का मंजर: भूस्खलन और मौत का तांडव-दार्जिलिंग हिल्स में भारी बारिश ने कई जगहों पर भूस्खलन किया, जिससे सरसाली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धरगांव, नगराकाटा और मिरिक लेक एरिया में मौतें हुईं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा बचाव दल मिलकर राहत कार्य में जुटे हैं। दार्जिलिंग के एसडीओ रिचर्ड लेप्चा ने बताया कि बचाव अभियान लगातार जारी है और फंसे हुए लोगों को निकालने की पूरी कोशिश की जा रही है। भूस्खलन की सबसे भयानक तस्वीरें धरगांव और नगराकाटा से आई हैं, जहाँ मिट्टी के तेज बहाव से कई घर मलबे में दब गए। अब तक 40 से अधिक लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है, लेकिन कई लोग अभी भी लापता हैं।
सरकार का एक्शन: मुआवजा, दौरा और राहत की घोषणा-मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और कहा है कि वह 6 अक्टूबर को उत्तर बंगाल का दौरा करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में हो रही तबाही पर गहरा दुख जताया है और कहा है कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करेगी। राज्य के मंत्री उदयेन गुहा ने हालात को “गंभीर और चिंताजनक” बताया।
सड़कें बंद, संपर्क टूटा: मुश्किल में फंसे लोग-भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे ट्रैफिक और राहत कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। मिरिक-सुखियापोखरी रोड पूरी तरह से बंद है। कई ऊंचे इलाकों की फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी पूरी तरह टूट गई है। एनडीआरएफ के मुताबिक, दार्जिलिंग से लेकर नॉर्थ सिक्किम तक सड़क संपर्क लगभग ठप हो गया है।
बारिश का कहर: 300 मिमी से ज्यादा बारिश-पिछले 12 घंटों में 300 मिमी से ज्यादा बारिश हुई, जिससे भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि भूटान में हुई भारी बारिश का पानी भी उत्तर बंगाल में भर गया है, जिससे नुकसान बढ़ गया। उन्होंने इसे “प्राकृतिक आपदा” बताते हुए कहा कि प्रशासन ने पांच जिलों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग की है और लगातार निगरानी की जा रही है।
पर्यटकों की फिक्र: सरकार का आश्वासन-दार्जिलिंग में हजारों पर्यटक फंसे हुए हैं, क्योंकि भूस्खलन के चलते सड़कें बंद हैं और कई इलाके कट चुके हैं। मुख्यमंत्री ने पर्यटकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और जल्दबाज़ी में इलाके से निकलने की कोशिश न करें। सरकार ने फंसे हुए सैलानियों को सुरक्षित निकालने की तैयारी शुरू कर दी है और राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं।
बचाव कार्य में बाधाएं: एनडीआरएफ और पुलिस की मुश्किलें-राहत कार्य लगातार चल रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश और फिसलन भरे पहाड़ी इलाके बचाव टीमों के लिए चुनौती बने हुए हैं। भारी बारिश की वजह से जेसीबी और अर्थमूवर मशीनें भी सही से काम नहीं कर पा रहीं। मिरिक, बिश्नुलाल गांव और जसबीरगांव के कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन और स्थानीय एनजीओ मिलकर प्रभावितों के लिए अस्थायी राहत शिविर चला रहे हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट: खतरा अभी टला नहीं-भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दार्जिलिंग और कालिम्पोंग समेत उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले **24** घंटे में बारिश और बढ़ सकती है, जिससे और भूस्खलन और सड़क अवरोध होने की संभावना है। एनडीआरएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिरिक को सिलिगुड़ी से जोड़ने वाला आयरन ब्रिज टूट गया है, जिससे पूरा इलाका बाकी हिस्सों से कट गया है। एक गांव पूरी तरह पानी और मलबे में घिरा हुआ है। यह स्थिति बहुत दुखद है, और हम उम्मीद करते हैं कि सभी सुरक्षित रहेंगे और जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
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