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महिलाएं सावधान! प्रेग्नेंसी समझकर इन मामूली लक्षणों को न करें नजरअंदाज! हो सकते हैं Heart Attack का खतरा

Heart failure in pregnancy: अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली शारीरिक तकलीफों को यह कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद सब ठीक हो जाएगा लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एक चौंकाने वाला खुलासा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था दरअसल एक महिला के शरीर के लिए कुदरती स्ट्रेस टेस्ट की तरह है। यह उन बीमारियों की भविष्यवाणी करती है, जो भविष्य में 50 की उम्र पार करने के बाद आपको घेर सकती हैं।

दिल पर बढ़ जाता है भारी दबाव

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में एडल्ट कार्डियक सर्जरी के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. समीर भाते के अनुसार एक स्वस्थ महिला के दिल को भी प्रेग्नेंसी के दौरान सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। जब शरीर इस ‘स्ट्रेस’ को झेलने में संघर्ष करता है तो कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण बताते हैं कि आपके शरीर का कौन सा हिस्सा भविष्य में कमजोर पड़ सकता है।

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ये 3 लक्षण हैं भविष्य की बीमारियों का ट्रेलर

गर्भावस्था के दौरान दिखने वाली इन समस्याओं को ‘वार्निंग साइन’ समझें:

  1. प्री-एकलम्पसिया (Pre-eclampsia): अगर प्रेग्नेंसी में आपका ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बढ़ जाता है तो यह भविष्य में क्रोनिक हाइपरटेंशन और हार्ट फेलियर का संकेत है।
    1. जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes): गर्भावस्था के दौरान शुगर बढ़ना इस बात का संकेत है कि 50 की उम्र के बाद आपको टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा बहुत ज्यादा है।
    2. सांस फूलना और घबराहट: यदि आपको चलने या हल्के काम में भी बहुत ज्यादा सांस फूलने की समस्या होती है तो यह भविष्य में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की धमनियों में रुकावट) की ओर इशारा करता है।
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    50 की उम्र के बाद होने वाली प्रमुख बीमारियां

    डॉक्टरों के अनुसार जिन महिलाओं की प्रेग्नेंसी में जटिलताएं (Complications) रही हैं, उनमें उम्र के दूसरे पड़ाव पर ये बीमारियां होने की संभावना 2 से 3 गुना बढ़ जाती है:

    • परमानेंट हाई ब्लड प्रेशर।
    • कोरोनरी आर्टरी डिजीज (धमनियों में ब्लॉकेज)।
    • अचानक हार्ट फेलियर का खतरा।
    • टाइप-2 मधुमेह।

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    बचाव के लिए क्या करें? (एक्सपर्ट टिप्स)

    अगर आपकी प्रेग्नेंसी चुनौतीपूर्ण रही है तो पछताने के बजाय अभी से ये कदम उठाएं:

    • नियमित जांच: डिलीवरी के कम से कम एक साल बाद तक अपना शुगर और बीपी हर महीने चेक करवाते रहें।
    • मेडिकल हिस्ट्री संभालें: अपनी प्रेग्नेंसी की सभी रिपोर्ट सुरक्षित रखें। भविष्य में जब भी किसी डॉक्टर के पास जाएं उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी की दिक्कतों के बारे में जरूर बताएं।
    • वजन पर नियंत्रण: संतुलित आहार और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। बढ़ा हुआ वजन हार्ट अटैक के खतरे को और बढ़ा देता है।
    • योग और नींद: तनाव को कम करने के लिए पर्याप्त नींद लें और योग का सहारा लें।
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