
वेदांता की 60वीं वार्षिक आमसभा में अनिल अग्रवाल ने पेश की 3डी रणनीति, कंपनी का आकार दोगुना करने का लक्ष्य
जतिन नचरानी
सक्ती, छत्तीसगढ़। वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कंपनी की 60वीं वार्षिक आमसभा (एजीएम) में विकास के अगले चरण का महत्वाकांक्षी विजन साझा किया। उन्होंने कंपनी का आकार दोगुना करने के लिए 3डी रणनीति—डीमर्जर, डायवर्सिफिकेशन और डीलीवरेजिंग—पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस रणनीति के तहत वेदांता की कुछ इकाइयों को अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों के रूप में स्थापित किया जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि डीमर्जर से गठित प्रत्येक इकाई में 100 बिलियन डॉलर (लगभग 8,35,000 करोड़ रुपये) की कंपनी बनने की क्षमता है। इस कदम से प्रत्येक व्यवसाय पर केंद्रित ध्यान दिया जा सकेगा, जिससे उनकी विकास गति में तेजी आएगी। डीमर्जर प्रस्ताव को 99.5 प्रतिशत से अधिक शेयरधारकों और लेनदारों का समर्थन प्राप्त हुआ है, जो कंपनी के प्रति उनके भरोसे को दर्शाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!डीमर्जर पूरा होने पर वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक शेयरधारक को चार नई इकाइयों में से प्रत्येक में एक शेयर प्राप्त होगा। डायवर्सिफिकेशन के तहत वेदांता मौजूदा कारोबार को मजबूत करने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में कदम रखेगी। कंपनी महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ धातुओं (रेअर अर्थ), ऊर्जा संक्रमण धातुओं, बिजली, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश करेगी। इसके लिए वेदांता ने भारत में 10 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक हासिल किए हैं, जो किसी भी निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारा सबसे अधिक हैं। इसके अलावा, कंपनी भारत का पहला औद्योगिक जिंक पार्क और सबसे बड़ा एल्यूमिनियम पार्क स्थापित कर रही है। ये परियोजनाएं हजारों एमएसएमई को बढ़ावा देंगी और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करेंगी, जिसे अग्रवाल ने ह्यधातु क्रांतिह्ण की शुरुआत बताया। डीलीवरेजिंग के जरिए कंपनी कर्ज कम करने पर ध्यान देगी, ताकि वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया जा सके और भविष्य के निवेश के लिए संसाधन जुटाए जा सकें। वेदांता की यह रणनीति भारत की आर्थिक और ऊर्जा जरूरतों के साथ पूरी तरह से जुड़ी है। अग्रवाल ने कहा कि भारत की भूवैज्ञानिक बनावट कनाडा और आॅस्ट्रेलिया जैसे संसाधन-समृद्ध देशों के समान है, लेकिन केवल 25 प्रतिशत हिस्से की ही खोजबीन हुई है। यह महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तेजी से विकास का सही समय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संसाधन इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
वेदांता ने 1000 डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की घोषणा की है, जो भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर को नई गति देगी और इसे देश का सबसे बड़ा औद्योगिक इनक्यूबेटर प्लेटफॉर्म बनाएगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में वेदांता का प्रदर्शन मजबूत रहा, जिसमें 1,50,725 करोड़ रुपये का राजस्व और 43,541 करोड़ रुपये का एबिटा दर्ज किया गया। कंपनी निफ्टी 100 में शीर्ष संपत्ति निर्माताओं में शामिल रही, जिसने शेयरधारकों को 87 प्रतिशत रिटर्न दिया। हिंदुस्तान जिंक 12,000 करोड़ रुपये के निवेश से 2.5 लाख टन का एकीकृत स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित कर रहा है। तेल और गैस क्षेत्र में, केयर्न ने सात नए ओएएलपी ब्लॉक हासिल किए हैं और इसका लक्ष्य उत्पादन को दोगुना कर 3 लाख बैरल प्रतिदिन करना है। एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता को 31 लाख टन तक बढ़ाया जा रहा है, साथ ही 30 लाख टन का नया ग्रीनफील्ड स्मेल्टर स्थापित करने की योजना है। अग्रवाल ने स्थिरता और सामाजिक विकास के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराया।
हिंदुस्तान जिंक ने वैश्विक धातु और खनन क्षेत्र में पहला स्थान हासिल किया, जबकि वेदांता एल्यूमिनियम एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2024 में दूसरा स्थान प्राप्त किया। कंपनी 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रही है। नंद घर पहल के तहत 15 राज्यों में 8,500 से अधिक केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो बाल विकास और महिला सशक्तिकरण में योगदान दे रहे हैं। अग्रवाल ने वेदांता यूनिवर्सिटी स्थापित करने के अपने सपने को भी साझा किया, जो हार्वर्ड जैसे संस्थानों से प्रेरित होगा और भारत में वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नेतृत्वकर्ताओं की अगली पीढ़ी तैयार करेगा। अग्रवाल ने वेदांता के एक लाख कमर्चारियों के योगदान की सराहना की और बताया कि कंपनी की 22 प्रतिशत कार्यबल और 28 प्रतिशत नेतृत्वकारी भूमिकाओं में महिलाएं हैं। 2030 तक 30 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व का लक्ष्य रखा गया है। यह रणनीति न केवल वेदांता के विकास को गति देगी, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और आर्थिक नेतृत्व के लक्ष्यों को भी मजबूत करेगी।
