और जीवनशैली

सिल्क और बनारसी साड़ी खरीदने से पहले जान लें दोनों के बीच का अंतर, ऐसे करें पहचान

साड़ियां भारतीय परंपरा और इतिहास में एक खास महत्व रखती हैं। शादी, त्योहार या किसी भी खास मौके पर महिलाएं साड़ी पहनना पसंद करती हैं। बाजार में कई तरह के फेब्रिक की साड़ियां मिलती हैं जैसे कॉटन, जॉर्जेट, ऑर्गेंजा, सिल्क, बनारसी आदि। इन सभी साड़ियों के फैब्रिक और डिजाइन में काफी अंतर देखने को मिलता है। लेकिन कई बार सिल्क और बनारसी साड़ी खरीदते समय अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि दोनों दिखने में एक जैसी ही लगती हैं। अगर आप सिल्क और बनारसी साड़ी खरीदने की सोच रहे हैं तो दोनों के बीच का अंतर जरूर जानना चाहिए।

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बनारसी और सिल्क साड़ी दोनों एक दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं है। दरअसल बनारसी साड़ी में अक्सर सिल्क कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों के बीच का मुख्य अंतर डिजाइन, बुनाई और काम में होता है।

सिल्क साड़ी

सिल्क साड़ी को रेशम के धागों से तैयार किया जाता है। यह साड़ी मुलायम, हल्की और चमकदार होती है। खासतौर पर दक्षिण भारत में कांचीवरम सिल्क, मैसूर सिल्क और भागलपुरी सिल्क जैसी साड़ियां बहुत लोकप्रिय हैं। अक्सर सिल्क साड़ियां सिंपल डिजाइन, हल्के प्रिंट और सॉफ्ट टेक्सचर वाली होती हैं। इस तरह की साड़ियों को आप ऑफिस, शादी या त्योहारों पर पहन सकती हैं।

बनारसी साड़ी

बनारसी साड़ी अपनी बुनाई और जरी के काम के लिए जानी जाती है। यह खासतौर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में बनाई जाती है। इस तरह की साड़ी में बेल, फूल-पत्तियों वाले पारंपरिक डिजाइन देखे जा सकते हैं जो हाथ से बनाए जाते हैं। शादी या किसी बड़े फंक्शन में अक्सर बनारसी साड़ी को पहनना पसंद किया जाता है। ये काफी रॉयल और क्लासी लुक देती हैं।

दोनों के बीच अंतर

सिल्क साड़ी और बनारसी साड़ी में फर्क करना थोड़ा मुश्किल होता है। सिल्क साड़ी काफी मुलायम होती है और इसमें एक प्राकृतिक चमक दिखाई देती है। वहीं दूसरी तरफ बनारसी साड़ी में बारीक बुनाई होती है जिसकी वजह से इसके पीछे की तरह धागों की बुनाई दिखाई देती है।

वजन और चमक

बनारसी साड़ी तुलनात्मक रूप से भारी होती है जिसमें असली सोने और चांदी की जरी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सिल्क की साड़ी बनारसी साड़ी की तुलना में हल्की हो सकती है। यह अपनी रेशमी चमक के लिए जानी जाती है।

सिल्क साड़ी भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती है। जैसे असम में मूगा सिल्क, दक्षिण भारत में कांजीवरम सिल्क आदि। वहीं बनारसी साड़ी खासतौर पर बनारस में बनाई जाती है जिसपर खास जरी का काम किया जाता है जिसकी वजह से इनकी कीमत थोड़ी ज्यादा होती है।

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