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इलेक्ट्रिक बनाम CNG थ्री-व्हीलर: कौन सा ऑटो है ज्यादा फायदे का सौदा?

 सीएनजी बनाम इलेक्ट्रिक ऑटो: भारत में कौन है आपका सच्चा साथी?- भारत की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा अब सिर्फ़ एक सवारी का साधन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का ज़रिया बन चुका है। छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक, ये तीन पहियों वाले साथी हर जगह अपनी छाप छोड़ रहे हैं। ऐसे में, जब बाज़ार में सीएनजी और इलेक्ट्रिक, दोनों तरह के ऑटो उपलब्ध हैं, तो एक आम आदमी के मन में ये सवाल ज़रूर आता है कि आखिर किसमें बाज़ी मारी जाए? चलिए, आज इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं और देखते हैं कि आपके लिए कौन सा ऑटो-रिक्शा सबसे बेहतर साबित होगा।

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शुरुआती लागत: जेब पर किसका है ज़्यादा भार?- जब भी हम कोई गाड़ी खरीदने की सोचते हैं, तो सबसे पहले नज़र उसकी कीमत पर जाती है। अभी की बात करें तो, एक नया इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा खरीदने के लिए आपको करीब 2.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। वहीं, अगर आप सीएनजी ऑटो-रिक्शा की ओर देखते हैं, तो ये थोड़े सस्ते पड़ते हैं और इनकी कीमत लगभग 2 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच मिल जाती है। तो, अगर आपका बजट थोड़ा टाइट है और आप चाहते हैं कि गाड़ी जल्दी ही अपनी लागत वसूल कर ले, तो शुरुआत में सीएनजी एक बेहतर विकल्प लग सकता है। लेकिन, असली कहानी तो आगे है। इलेक्ट्रिक ऑटो की जो ज़्यादा शुरुआती कीमत है, वो धीरे-धीरे उसके कम चलने के खर्च और कम मेंटेनेंस की वजह से वसूल हो जाती है। इसलिए, अगर लंबे समय के हिसाब से देखें, तो इलेक्ट्रिक ऑटो महंगा नहीं, बल्कि ज़्यादा किफ़ायती साबित होता है। यह एक तरह का निवेश है जो आपको लंबे समय में फायदा पहुंचाता है।

रोज़ का खर्च: बचत का असली खेल- अगर आप हर दिन के खर्च की बात करें, तो यहीं पर इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा अपना सबसे बड़ा जलवा दिखाता है। एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को चलाने का खर्च, यानी चार्जिंग का, लगभग 0.5 से 0.7 रुपये प्रति किलोमीटर आता है। वहीं, दूसरी तरफ, सीएनजी ऑटो-रिक्शा का खर्च 2.5 से 3 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुँच जाता है। सोचिए, अगर आप रोज़ाना 100 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं, तो इलेक्ट्रिक ऑटो में आपका खर्च सिर्फ़ 60-70 रुपये होगा, जबकि सीएनजी ऑटो में यही खर्च 250-300 रुपये तक जा सकता है। महीने भर में यह अंतर करीब 5,000 से 6,000 रुपये तक का हो सकता है! यह बहुत बड़ी रकम है, जिससे आप इलेक्ट्रिक ऑटो की शुरुआती ज़्यादा कीमत को आसानी से वसूल कर सकते हैं। यही वजह है कि आज के समय में इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के बीच इतना लोकप्रिय होता जा रहा है, क्योंकि यह सीधे-सीधे उनकी कमाई बढ़ाता है।

 मेंटेनेंस का झंझट: कौन है ज़्यादा सुकून वाला?- इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा की एक और बड़ी खूबी है उसका कम मेंटेनेंस। इसमें पारंपरिक इंजन नहीं होता, इसलिए आपको ऑयल बदलवाने, स्पार्क प्लग या फिल्टर जैसी चीज़ों की चिंता करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। इसमें पार्ट्स भी कम होते हैं, जिससे गाड़ी के खराब होने की संभावना भी कम हो जाती है और मेंटेनेंस का खर्च भी काफी कम हो जाता है। इसके बिल्कुल विपरीत, सीएनजी ऑटो-रिक्शा को नियमित सर्विसिंग की ज़रूरत पड़ती है। समय-समय पर उसकी ट्यूनिंग करवानी पड़ती है, फिल्टर बदलने पड़ते हैं और छोटे-मोटे रिपेयर पर भी अच्छा-खासा पैसा खर्च हो जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा लंबे समय तक बिना किसी बड़े झंझट के और कम खर्च में चल सकता है। खासकर उन ड्राइवरों के लिए जो दिन भर गाड़ी चलाते हैं, इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा एक बहुत ही आरामदायक और किफ़ायती विकल्प साबित होता है। यह उन्हें बार-बार वर्कशॉप के चक्कर लगाने से बचाता है और उनका कीमती समय भी बचाता है।

 रेंज और रीफ्यूलिंग: कौन भरता है लंबी उड़ान?- यहां मामला थोड़ा बदल जाता है। इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा एक बार फुल चार्ज होने पर करीब 80 से 120 किलोमीटर तक चल पाता है। और हाँ, इसे पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है। तो, अगर आपकी रोज़ाना की रनिंग बहुत ज़्यादा नहीं है और आपके पास चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध है, तो यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। लेकिन, अगर हम सीएनजी ऑटो-रिक्शा की बात करें, तो यह एक फुल टैंक में लगभग 150 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि जब इसका फ्यूल खत्म होता है, तो इसे रीफ्यूल करवाने में सिर्फ़ कुछ ही मिनट लगते हैं। तो, अगर आपका काम लंबी दूरी का है या आपको लगातार चलते रहना पड़ता है, तो सीएनजी ऑटो-रिक्शा आपके लिए ज़्यादा आसान और सुविधाजनक विकल्प साबित होगा। यह आपको समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद करता है, बिना किसी इंतज़ार के।

आखिर में, आपका विजेता कौन?- तो, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आपके लिए सबसे अच्छा ऑटो-रिक्शा कौन सा है? देखिए, अगर आपकी रोज़ाना की दौड़-भाग ज़्यादातर शहर के अंदर ही रहती है और आपके पास गाड़ी चार्ज करने की सुविधा आसानी से मौजूद है, तो इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा आपके लिए एक किफ़ायती और समझदारी भरा फैसला होगा। यह न सिर्फ आपके पैसे बचाएगा, बल्कि लंबे समय तक आपको कम झंझट भी देगा। लेकिन, अगर आपका काम ऐसी जगहों पर है जहाँ लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जहाँ तुरंत फ्यूल भरवाना ज़रूरी है और चार्जिंग का इंतज़ाम करना मुश्किल है, तो आपके लिए सीएनजी ऑटो-रिक्शा ही बेहतर रहेगा। तो, आखिरकार यह चुनाव पूरी तरह से आपके काम करने के तरीके, आपके बजट और आपकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों पर निर्भर करता है। सोच-समझकर फैसला लें!

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