
करूर हादसे: राजनीतिक भूचाल और विजय का पलटवार-तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों करूर में हुए हादसे की गूंज सुनाई दे रही है। 27 सितंबर को करूर में विजय की चुनावी रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इस घटना ने अभिनेता से नेता बने विजय को सीधे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विजय का दर्द और स्टालिन पर निशाना-विजय ने इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का सबसे दुखद पल है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। विजय का मानना है कि इस समय राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर किसी को निशाना बनाना है, तो उन्हें बनाएं, लेकिन उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान न करें। विजय ने हमेशा जनता की सुरक्षा और उनके भले को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि रैलियों में शामिल लोग उन्हें प्यार और सम्मान देते हैं, और उनकी सुरक्षा किसी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से बढ़कर है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल-हादसे के बाद पुलिस ने TVK नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। करूर पश्चिम जिला सचिव माथियाज़ागन और टाउन कार्यकर्ता पौन राज को हिरासत में लिया गया, जिनमें से पौन राज को 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक पत्रकार और एक यूट्यूबर को भी इस मामले में पकड़ा गया। विजय ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि रैली पूरी तरह से निर्धारित जगह पर हुई थी और उसमें कोई गलत काम नहीं हुआ था। इसके बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज की और उनके समर्थकों को भी निशाना बनाया। विजय का तर्क है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और सच्चाई सामने आने पर सब कुछ साफ हो जाएगा।
तमिलनाडु की राजनीति में उबाल-करूर हादसे ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष और समर्थक दोनों ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। विजय का यह बयान न केवल राजनीतिक बहस को तेज कर रहा है, बल्कि मुख्यमंत्री स्टालिन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। हादसे ने यह साफ कर दिया है कि जनता की सुरक्षा और राजनीतिक रैलियों की व्यवस्था पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। विजय ने यह भी कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को सहारा देने और जिम्मेदारी निभाने का है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और असली दोषियों को उजागर किया जाएगा।

