
12 दिन की जंग: ईरान की जीत या हार?-यह लेख ईरान और इज़राइल के बीच 12 दिन चली जंग पर केंद्रित है, जिसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने चुप्पी तोड़ी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!खामेनेई का दावा: जीत की घोषणा-जंग के बाद खामेनेई ने ईरान की जीत का दावा किया। हालाँकि, इज़राइल के लगातार हमलों और हुए नुकसान को देखते हुए यह दावा कितना सही है, यह सवाल उठता है। इज़राइल ने कई अहम ठिकानों को तबाह किया, फिर भी खामेनेई इसे जीत बता रहे हैं। क्या यह सिर्फ़ जनता का हौसला बढ़ाने की एक रणनीति है?
रिवोल्यूशनरी गार्ड को झटका-इज़राइल के हवाई हमलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को निशाना बनाया। कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार में भारी कमी आई। इससे ईरान की सैन्य ताकत कमज़ोर हुई है। यह हमला ईरान की सैन्य शक्ति के लिए एक बड़ा झटका है, जिससे उसकी रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर असर-इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए। अमेरिका ने ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल किया, जिससे भूमिगत ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को कितना नुकसान हुआ है, इसका सही आकलन अभी तक नहीं हो पाया है। यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि परमाणु कार्यक्रम ईरान की शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
‘एक्सिस ऑफ़ रेजिस्टेंस’ को नुकसान-ईरान के ‘एक्सिस ऑफ़ रेजिस्टेंस’ (मध्य पूर्व में सहयोगी देशों और लड़ाकों का गठबंधन) को भी इस युद्ध में भारी नुकसान हुआ है। इज़राइल ने हमास के हमले के बाद से इन सहयोगियों को निशाना बनाया है, जिससे ईरान की क्षेत्रीय पकड़ कमज़ोर हुई है। यह ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और उसके सहयोगियों के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
अमेरिका का हस्तक्षेप: जंग का मोड़-अमेरिका के हस्तक्षेप ने जंग को रोका। यह ईरान के लिए राहत भरा था, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। अमेरिका की भूमिका इस जंग में एक निर्णायक कारक रही है, जिसने युद्ध के परिणाम को प्रभावित किया। इससे क्षेत्रीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
खामेनेई का बयान: राजनीतिक बयानबाजी या सच्चाई?-खामेनेई का बयान आत्मविश्वास दिखाता है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सिर्फ़ जनता का हौसला बढ़ाने की कोशिश है? हुए नुकसान को देखते हुए कई विशेषज्ञ इसे ‘कूटनीतिक जीत’ नहीं मानते। असली तस्वीर आने वाले समय में ही साफ़ होगी। यह बयान राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकता है, और वास्तविकता से अलग हो सकता है।

